Monday, August 16, 2010

शुरुआत...



             चलिए शुरुआत एक बात से करतें हैं...कुछ ही महीने पहले की बात है ... किसी  ने मुझसे पुछा था की हमें कभी किसी फकीर को बुरा क्यूँ नहीं बोलना चाहिए ??... मैंने जवाब तो दिया था पर उसका जवाब, लाजवाब था...    
               उसने कहा की जो भी बात किसी  से कही जाती है वो एक energy के form में travel करती है... अगर हम receive कर लें तो हमपे असर होता है अगर हम receive न करीं तो वो 40 दिनों के बाद उसी तक पहुँच जाती है जिसने बोली होती है... तो फकीर इस energy को receive नहीं करते और अगर हम बुरा बोलतें है तो वो हमें वापिस आकर परेशान करती है... 
                ये सिर्फ फकीरों के साथ नहीं बल्कि हर इंसान पे लागू होता है ... अगर हम किसी की कही हुई बात को अनसुना कर दें तो वो वापिस चली जाएगी जहां से आई है... 
              उसकी बात सुन कर मैंने सोच ये बहुत अच्छा तरीका है खुश रहने का ... मैं भी कोशिश करुँगी ऐसा कुछ करने की... थोड़ी की भी... 
               फिर ख़याल आया की मुझे बुरा कौन बोलता है ... जाने या अनजाने ... और वो कौन हैं जिनकी बातों का असर मुझ पर होता है... वो मेरे अपने ही तो हैं...अगर मैं receive नहीं करुँगी तो वो वापिस जा कर उनको परेशान करेगा ...फिर वो दुखी होंगे ... और अगर वो दुखी होंगे तो मैं खुश कैसे रहूंगी....दोनों सूरतों में मैं खुश नहीं हो सकती...इससे अच्छा है की receive कर लूं ... किसी और को दुखी करने के बजाये खुद ही दुखी हो लूं... 
               दोस्त! तुमने बात तो बहुत पते की बताई थी ... शायद मेरे जैसे पागल इंसान पे लागू नहीं होती... पर मैं ये चाहती हूँ की तुम इससे हमेशा अपनाओ.. ताकि तुम हमेशा खुश रहो ... शायद तुम ये अपनाते भी हो क्यूंकि मैंने तुममे फकीरों सी बात पाई है ... कौन सी ???... इसका जवाब फिर कभी...पर हाँ आजतक मैंने जो तुम्हें बुरा कहा है ... उसने वापिस लौट कर मुझे बहुत दुखी किया है...

10 comments:

  1. Wow, what a theory...? But still I have a query;
    जब हम किसी की भलाई के लिए उसे बुरा-भला कहें......... तब..?

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  2. bhalai ke liye bhura- bhala??? bhalai ke liye sirf bhala....no bura...

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  3. burai kar bura hoga bhalai kar bhala hoga

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  4. i feel we see our reflection in others,if we r good we will always find something good in others, kyonki burai kisi aur me kyun dekhe jab hum me iski koi kami nahi.may be because of that the burai comes back to us again as a reflection.

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  5. good one the important thing is your test. which i like the most

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  6. hi again good poem

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  7. कल 10/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. lakin agar main khosh nahi rahongi to dusroo ko khush kase rakh paoungi isliye bhla to recive kar lo aor bura shiv ki tarha gale main dharan kar lo dil dhimag tak mat pahuchne do .

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  9. @ anonymous ... aapne bahut achhi baat kahi hai ... achha hota agar aap pana parichaye bhi dete ... :)

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