Saturday, October 2, 2010

तेरे साए में पनाह दूं........















...................क्षितिज तक फैले
ज़िन्दगी के तनहा सेहरा को.....
तेरे
इश्क की बाहों में समा लूं....

तेरे  एहसास के गहरे समुन्दर से
उम्र की 'सूखी' रेत भिगो दूं....

......और कहीं किनारे बैठ कर  
थोड़े घरौंदे बना कर..............
एक गाँव बसा दूं...................

................कभी उसे हकीक़त
तो कभी ...सपने का नाम दूं...

तेरे साए में पनाह दूं................

60 comments:

  1. बहुत खूब ''कभी उसे हकीकत तो कभी सपने का नाम दूं''
    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर..
    काफी अच्छा लिख रही है आप,लिखते रहिए.

    संजय सेन सागर
    हिन्दुस्तान का दर्द

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  2. क्षितिजा के काव्य क्षितिज पर एक और सितारा . सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  3. बेहद खूबसूरत....बेहतरीन भाव हैं

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  4. बहुत ह्रदयस्पर्शी संवेदना....सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  5. क्या खूब, कुछ छोटे एहसासों को कैसे आप कवितओं में ढाल देती हैं. सच, बहुत सुन्दर.
    मनोज खत्री

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  6. एक विकल अहसास ,एक तृष्णा एक अकथ चाह को मुकाम तक ले जाती कविता -सुन्दर !

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  7. bahut khub.....aapki kalam mein mein kuch to jadoo hai...
    kabhi idhar bhi padharein...
    http://i555.blogspot.com/

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  8. xitija bahut khoobsurat likha hai aapne

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  9. बहुतखूब बहुतखूब !

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  10. विचारों को लज्ज़तदार बना कर परोसना आपको आता है.बढ़िया है.
    कुँवर कुसुमेश
    समय हो तो मेरा ब्लॉग देखें :kunwarkusumesh.blogspot.com

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  11. कभी बैठ एकान्त जगह,
    तू हँसती है, मैं सुनता हूँ ।
    इन स्वप्नों के अर्धसत्य को,
    कब तक यूँ ही झुठलाना है ?

    अथक कल्पना, अतुल समन्वय,
    मन भावों की कोमल रचना ।
    इस प्रतिमा में लेकिन जाने,
    कैसा रंग चढ़ाना है ?

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  12. ओहो ..... आपकी सोच तो बहुत गहरी है
    साइज में छोटी रचना है पर इसे पूरा महसूस करने में बहुत टाइम लगा
    आपके घर के आस पास नेचुरल रिसोर्सेज [झील , पहाड़ियां , पेड़ आदि ] बहुत जयादा हैं लगता है
    वर्ना सोच में इतनी गहराई मुश्किल है [मेरे लिए तो :))]

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  13. @nawaz sahaab,kailash ji , manoj ji, arvind ji . shekhar ji rajni ji , vivek ji , kunwar jipraween ji , gourav ji

    aap sab ka bahut bahut shukriya ....

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  14. बेहद खूबसूरत अन्दाज की रचना

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  15. तेरे एहसास के गहरे समंदर से
    उम्र की 'सूखी' रेत भिगो दूं …

    …और कहीं किनारे बैठ कर
    थोड़े घरौंदे बना कर
    एक गांव बसा दूं …


    काश ! इतने ख़ूबसूरत जज़बात , इतने ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ में मेरी किसी ग़ज़ल में आ'कर ढले होते … काश !!

    ……कभी उसे हकीक़त
    तो कभी … सपने का नाम दूं …


    वाह ! वाऽह ! वाऽऽऽह !

    ख़ूबसूरत हृदय में ही ख़ूबसूरत जज़बात होते हैं , जिनके कारण व्यक्तित्व भी ख़ूबसूरत होता है ।

    क्षितिजा जी
    आपके यहां जब भी आया ,
    आ'कर आपके भावों , आपके कृतित्व
    और निस्संदेह आपके व्यक्तित्व की सुंदरता को अनुभव किया है ।

    ता'रीफ़ में शब्द नहीं हैं मेरे पास
    बस , अपना एक शे'र आपको नज़्र करते हुए विदा लेता हूं -
    गुलाबों - से मुअत्तर हों , हो जिनकी आब गौहर - सी
    कहां से लफ़्ज़ वो लाऊं … तुम्हारी दास्तां लिखदूं


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  16. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (4/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  17. तेरे अहसास के समन्दर...सूखी रेत..और किनारे बैठकर घरौंदे बनाकर गांव बसाने का तसव्वुर ..एहतराम के काबिल है। तसलीम।

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  18. This comment has been removed by the author.

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  19. लिल्लाह!
    आशीष
    --
    प्रायश्चित

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  20. mn ki khwaahishoN ko
    lafzoN ki khoobsurat zabaan de kar
    bahut achhee kavitaa kahee hai .

    mubarakbaad .

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  21. बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

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  22. तेरे अहसास के गहरे समंदर से उम्र की सूखी रेत भीगा दूँ ...
    सुन्दर ..!

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  23. बहुत सुन्दर ..भीगी भीगी सी नज़्म

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  24. xitija जी, (अपने नाम को आप हिंदी में कैसे बदलती हैं)

    इस शानदार रचना पर बधाई ....जैसे मैंने पहले भी कहा है आप कुछ उचाईयों को छूती हैं यही मुझे पसंद आता है ....बहुत सुन्दर भाव भर दिए हैं आपने ....और तस्वीर के चयन में आपकी पसंद की दाद देता हूँ |

    फुर्सत मिले तो जज़्बात पर आकर नयी पोस्ट ज़रूर पढ़े .........धन्यवाद |

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  25. @ verma ji, rajenderji, vandana ji, zahid ji, aashish ji, muflis ji, shobhna ji, sanjay ji, vani ji ,sangita ji , ansaari sahaab ...

    aap sab ka tahe dil se shukriya ....

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  26. वाह नया नया सा खूबसूरत एहसास.

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  27. बढ़िया लिखा है आपने...एक सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई..शुभकामनाएँ

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  28. achchha laga apko padhna...keep it up

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  29. shayad har kisi dil ki tamanna ........
    bahut sundar shabdon mein bayan kiya hai ..
    plz keep it up

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  30. अले वाह, बहुत अच्छी कविता ....चित्र भी शानदार . मैं भी तो कानपुर में थी.

    ___________________
    'पाखी की दुनिया' में अंडमान के टेस्टी-टेस्टी केले .

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  31. उमड़ते घुमड़ते अहसासों की सुन्दर बानगी ......

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  32. bahut si achhi rachna..... man bhavon ka behtreen chatran......

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  33. जितनी सुन्दर कविता है उतना ही सुन्दर चित्र भी है.

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  34. तेरे एहसास के गहरे समुन्दर से
    उम्र की 'सूखी' रेत भिगो दूं....
    -
    -
    आह ....
    क्या बात है
    बेहद सुन्दर भावमयी रचना
    -
    आभार
    यहाँ आना अच्छा लगा
    शुभ कामनाएं

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  35. kya bat hai ! jroor aap me koi to bat hai .aapko our bhi janna chahungi aapki rchnao ke madhym se .

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  36. क्षितिजा जी इतनी खूबसूरत नज़्म के लिए अल्फाज़ नहीं हैं मेरे पास .....
    इसलिए राजेन्द्र जी की टिपण्णी को ही मेरी समझें ......!!

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  37. @ psingh ji, yogender ji, aashishji, anamika ji, vinod ji, avinaash ji, neeta ji, akshita ji, kavita ji, monika ji, abhi ji, prakaash ji, rajwant ji, sanjay ji, virender ji, harkeerat ji..

    aap sab ka bahut bahut shukriya

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  38. खूबसूरत अहसासों को सजोती बेहतरीन रचना...बधाई.


    __________________________
    "शब्द-शिखर' पर जयंती पर दुर्गा भाभी का पुनीत स्मरण...

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  39. बहुत खूबसूरत नज़्म ... गहरे एहसास में डूब कर लिखी हुई नज़्म .... अल्फाज़ों का जादू ...

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  40. अच्छा लिखा
    कभी हमारे द्वारे भी आना
    जै राम जी की

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  41. इतने कम शब्दों में इतनी गहरी बात कहने का हुनर सबको नहीं आता लेकिन आप इसमें पारंगत हैं...इस विलक्षण रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  42. नवरात्रा स्थापना के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं

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  43. बहुत गहन अभिव्यक्ति..वाह!

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  44. Behad Sunder hai.....Aisa hi sapna mein bhi dekhta hoon.

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  45. बस दोस्त , ऐसी नज्मे न लिखा करो

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  46. खूबसूरत अहसास , उछाह ,आशा और उमंग की अभिव्यक्ति !

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