Saturday, October 23, 2010

रात जाते-जाते....





















.रात की चादर जब उतरने लगी.
...सुबह की तरफ सरकने लगी...
......तारे सारे जगमगा उठे........
...और ख्वाब सारे धुंधला गए...

....तो ऐसे में ये क्या बात हुई....
..............जो भी हुई ...............
...........कुछ ख़ास हुई.............

.....चाँदनी अपनी तपिश में......
....सर्द जज़्बात पिघला गयी.....
....एक दर्द कहीं सुलगने लगा...
..तेरा सोया एहसास जगा गयी..

...........रात जाते-जाते............
...आज ये क्या काम कर गयी...
........अब भी मैं ज़िन्दा हूँ .........
........ये यकीन दिला गयी..........

22 comments:

  1. वाह....
    एक बार फिर आपने हमें निःशब्द कर दिया.......
    बेहतरीन एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति, जिसमे आपके शब्द चयन की कला ने चार चाँद लगा दिए हैं........

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  2. 4/10

    औसत पोस्ट
    आखिरी की चार पंक्तियाँ कुछ ख़ास सी लगीं.

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  3. बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..आखिरी पंक्तियाँ तो लाजवाब हैं.

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  4. २ बार पढ़ी मैंने तो
    मुझे तो पूरी कविता अच्छी लगी...
    उस्ताद जी ने ४ दिए बहुत बड़ी बात है
    यूँ ही लिखती रहें एक दिन १० मिलेंगे...

    इधर भी आईये ....

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  5. एक दर्द कहीं सुलगने लगा,
    तेरा सोया अहसास जगा गई।

    कोमल भावनाओं से भीगी अच्छी पंक्तियां।

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  6. aap sab ka dhanyawaad ...

    ustaad ji aagli baar aur achha likhne ki koshish karungi ...

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  7. बहुत ही सुन्दर रचना| धन्यवाद|

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  8. रात जाते जाते जिन्दा रहने का यकीन दिला गयी दिल को छूती है यह पंक्तियाँ सुंदर रचना, बधाई

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  9. seriously xitija ji aapki kalam mein jadu hai...
    kitne sunder tareeke se aapne vichao ko piroya hai..really nice

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  10. रात यकीनन कमाल कर रही है, जाते जाते कुछ खास याद दिला रही है, सुबह फिर एक बार जिंदा होने के लिए आज रात सोना होगा..

    अच्छी कविता..

    manojkhatrijaipur.blogspot.com

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  11. किसी की सर्द बेरुखी में बहुत तपिश होती है, लगातार दिल जलाती रहती है।

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  12. बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं क्षितिजा..... निसंदेह आखिरी पंक्तियाँ मुझे भी
    बहुत पसंद आयीं

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  13. सुंदर अभिव्यक्ति ,आखिरी पंक्तियां कमाल हैं ।

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  14. गजब कि पंक्तियाँ हैं ...

    बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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  15. सुन्दर रचना!
    --
    मंगलवार के साप्ताहिक काव्य मंच पर इसकी चर्चा लगा दी है!
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  16. pratyek pankti ati sundar...........likhte rahiye

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  17. shabdo ka sundar chayan apnee baat kahane ka

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  18. क्षितिजा जी,

    ये रचना पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर लगी मुझे........एक सामंजस्य है शब्दों में .......खुबसूरत अहसास.........खुबसूरत लफ़्ज़ों के साथ.....शुभकामनाये|

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