Friday, November 19, 2010

उफ़ !!....





















इस तरह,  हर गम से खुद को बचा रखा है 
एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है...

मेरी आँखों में अक्सर उतर आता है सैलाब
कुछ तूफानों को अपने दिल में बसा रखा है....

तेरी यादों की क़ैद से भाग भी जाते लेकिन 
ये ताला हमनें अपने हाथों से लगा रखा है.....

राहे-उसूल पे कुछ न मिला एक दर्द के सिवा 
अपने वजूद को गहरे ज़ख्मों से सजा रखा है...

तड़प रहा है रूह का पंछी, कितने ही सालों से
रेशा-रेशा उम्र जोड़ जिस्म ने जाल बना रखा है ..

आहें, सर-सराहटें, सिसकियाँ, सरगोशियाँ हर सू
उफ़!! ख़ामोशी ने, तन्हाई ने, कितना शोर मचा रखा है...

91 comments:

  1. शोर तो तन्हाई ही मचाती है,
    बारिशें तो झट से गुज़र जाती हैं।

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  2. क्षितिजा जी ,
    आपकी पंक्तियां कॉपी नहीं हो पा रहीं हैं

    आप जो कहना चाह रहीं हैं वह निशाने पर जा रहा है
    कुछ शेर वाकई बहुत अच्छे हैं

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  3. ख़ामोशी ने शोर मचा रखा है...
    विरोधाभाष अलंकार का अच्छा प्रयोग
    राजेश नचिकेता

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  4. ख़ामोशी का शोर.
    कमाल है क्षितिज जी,मज़ा आ गया. कविता की विरोधाभाषी अभिव्यक्ति में

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  5. uff !!
    क्या खूब लिखा है आपने, सच में खामोशियों ने शोर मचा रखा है | यह तन्हाई और ये ख़ामोशी ही सबसे ज्यादा परेशान करती है |

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  6. तेरी यादों से भाग भी जाते मगर
    ये ताला हमने अपने हाथों से लगा रखा है ...
    सच ...उफ़ ....:)
    बेहद खूबसूरत एहसास !

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  7. .....पढ़कर मुझे एक अंगरेजी की कविता याद आ गयी जो बरसों पहले मैंने पढी थी ...
    एनाटामी आफ लोनेलिनेस .....अकेलेपन का सूक्ष्मान्वेषण ..यही आपने इस अहसासों से भरी कविता में किया है
    क्या भावों की इतनी सघनता / इतने गहन अहसास के साथ भी मनुष्य जी सकता है ?

    आपकी कवितायें गहरा सम्प्रेषण भाव रखती हैं ..मैंने पहले भी कहा ....

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  8. मगर आप जिए सवा सौ साल जियें और हमें ऐसी उम्दा रचनाओं से उपकृत करती रहें ! :)

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  9. ग़मों-तन्हाइयों को थोड़ी गुदगुदी करके देखिये,
    इस जिंदगी ने मज़ा कहाँ कहाँ छुपा कर रखा है ;)

    बहुत अच्छी अभिव्यक्ति, कुछ बाकी है, वो भी धीरे धीरे खुद ब खुद ही आ जाएगा , जारी रखिये ....

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  10. क्षितिजा जी,

    बहुत खुबसूरत ग़ज़ल.....एक सम्पूर्ण अभिव्यक्ति....कुछ शेर बहुत कमाल के हैं....रेशा-रेशा उम्र.....बहुत खूबसूरत......शुभकामनाये इस रचना पर|

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  11. तेरी यादों की क़ैद से भाग भी जाते लेकिन,
    ये ताला हमने अपने हाथों से लगा रक्षा है।

    बहुत ख़ूब...
    भावनाप्रधान रचना,
    हर शे‘र लाजवाब है।

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  12. कौन कहता है कि पत्थर नहीं रोया करते....उसके दर्द को अपने दिल में महसूस कर के तो देखो.

    कुछ यही अहसास कराती है आपकी ये खूबसूरत रचना.

    "....एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है...."...वाह!

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  13. bohot khoobsurat khayaal hain saare, har sher bada pyaara hai :)

    haan, ghazal ka flavor zara kam laga, shayad meter ki wajah se, par jo bhi likha hai, vo bohot sundar hai. aakhiri sher to bas...ufff.... ;)

    lovely yaara, great job !

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  14. @ प्रवीन जी ... सही कहा आपने .. बारिशें तो झट से गुज़र जातें हैं ...
    @ ज़ाहिद जी ... आपका बहुत बहुत शुक्रिया ..
    @ राजेश जी .. धन्यवाद आपका
    @ कुंवर जी ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद ...
    @ ZEAL ... thank u
    @ शेखर जी ... शुक्रिया ...
    @ वाणी गीत .. शुक्रिया

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  15. @ मिश्रा जी ... 'एनाटामी आफ लोनेलिनेस' ज़रूर पढूंगी ये कविता .. आपकी दुआ के लिए धन्यवाद .. :)
    @ मजाल जी ... ज़रूर कोशिश करुँगी ... :)
    @ इमरान जी ... बहुत बहुत शुक्रिया ..
    @ महेंद्र जी ... आपके धन्यवाद ...
    @ यशवंत जी ... धन्यवाद
    @ साँझ .. शुक्रिया .. यार ! technical details का पता नहीं है .. बस लिख देती हूँ जो मन में आता है .. पर तुमने बोला है तो अगली बार ज़रूर ख़याल रखूंगी meter का ... thanks

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  16. khamoshi ka shor
    koi to bat hai jo aapme hai ouro me nhi .
    bhut khoob .

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  17. ओह! कमाल का लेखन्…………दर्द का गहन चित्रण्।

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  18. बहुत सारा दर्द आपने इस कविता में समेत रखा है...
    सुन्दर रचना...

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  19. वाह ! क्या बात है ....आनंद आगया बहुत कमाल की प्रस्तुति है
    तनहाई का शोर बहुत सुन्दर विरोधाभास प्रयोग .....बधाई
    यहाँ भी पधारे
    दुआएँ भी दर्द देती है

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  20. इस तरह कहने में क्या बुराई है ?

    'सर्द आहें, सिसकियाँ, सरगोशियाँ हर सू
    उफ़!! तन्हाई ने, कितना शोर मचा रहा है'

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  21. @ anonymous ... यूँ तो अपनी पहचान बताने में भी कोई बुराई नहीं ...

    इतना ही कहूँगी आपने इसे और भी खूबसूरत बना दिया ... शुक्रिया ...

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  22. तेरी यादों की क़ैद से भाग भी जाते लेकिन
    ये ताला हमनें अपने हाथों से लगा रखा है.....
    वाह ! क्या खूब लिखा है आपने.........
    बधाई हो....

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  23. bohot hi khubsurat rachna... dil ki vyatha ka bohot unda chitran...

    maan gaye ustaad :)

    thanks for sharing,
    Vins :)

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  24. तेरी यादों के कैद से भाग भी जाते लेकिन
    ये टला हमने अपने हाथो से लगा रखा है

    बहुत ही बेहतरीन, ज़बरदस्त!



    प्रेमरस.कॉम

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  25. आपकी इस रचना को पढ़ तो हमारे मन से भी यही निकला...

    उफ़ - क्या लाजवाब लिक्खा है !!!

    बहुत ही बेहतरीन रचना...

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  26. आपकी रचना बहुत ही उम्दा है
    आपको इस खूबसूरत रचना के लिए बधाई

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  27. क्षितिजा जी, आपके भाव और आपका अंदाजे बयां दोनों मन को मोहने वाला है। हार्दिक बधाईयां।

    ---------
    वह खूबसूरत चुड़ैल।
    क्‍या आप सच्‍चे देशभक्‍त हैं?

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  28. @ राजवंत राज जी .. आपका धन्यवाद..
    @ वंदना जी ... धन्यवाद
    @ पूजा ji ... आपका शुक्रिया ..
    @ रानीविशाल ji ... धन्यवाद आपका ..
    @ आशीष जी .. शुक्रिया ..
    @ विन्स जी ... शुक्रिया ..
    @ शाह नवाज़ जी ... शुक्रिया ..
    @ रंजना ji ... बहुत बहुत धनयवाद ...
    @ राजकुमार जी ... शुक्रिया आपका ...
    @ जाकिर अली जी ... शुक्रिया ..
    @ मासूम जी ... शुक्रिया ..
    @ इन्द्रनील जी ... शुक्रिया ..

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  29. itna talent aapne blog mein chupa rakha hai.wonderful!

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  30. क्षितिजा जी !
    इतनी कम उम्र में इतने अनुभव !
    इतने कम शब्दों में इतनी गहरी बातें .........
    सच .....आप पूरी ज़िंदगी बयान कर देती हैं एक पल में .....
    आपकी कलम में जादू है.......

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  31. बहुत ही अच्छी ग़ज़ल ..अच्छी रचना के लिए बधाई

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  32. बेहतरीन शब्दों का चुनाव .बहुत सुन्दर गज़ल.

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  33. आपकी कविता तो सुपरहिट ही गयी आज....हा हा हा...

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  34. ahsas ko pathr ka libas pehna rekha hai....bhut khoob....

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  35. 7/10

    भावों से सजी बेहतरीन ग़ज़ल
    शुरू के तीनों और आखिरी शेर ख़ास तौर पर असरदार हैं.
    बेनामी जी का संशोधन सही लगता है ..

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  36. गम को बड़ी खूबसूरती से सजाया गया है... अभिनन्दन!

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  37. dard jab geet ban jaye to zindagi ke mayne badal jate hain ... her kadam gahre nishaan ban jate hain

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  38. very nice poem.
    www.utkarsh-meyar.blogspot.com

    ReplyDelete
  39. क्षितिजा जी अच्छी रचना अंतिम दो लाइने
    आंहे,सर- सराहटे, सिंसकिया,सरगोंसिया हर सु
    उफ़!!खामोसी ने, तन्हाई ने कितना शोर मचा रखा है!!
    बहुत ही उत्कृष्ट है ! अंतिम लाइन का अंतिम शब्द रहा है को मैंने रखा है लिखा है !!शायद त्रुटिवश आपने ऐसा लिखा हो !

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  40. बहुत खूबसूरत गज़ल ...उसूलों पर चलने वालों को कांटे ज्यादा मिलते हैं

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  41. "बहुत सोचा की कैसे तारीफ करें,
    कमबख्त विचारों की पोटली में
    लफ़्ज़ों का टोटा पड़ गया..."
    आपकी "clarity of thoughts" की दाद देता हूँ क्षितिजा जी..धन्यवाद

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  42. bahut hi acchi baat..
    alag andaaj me kaha..
    abhinandan

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  43. इतना दर्द और ये सवेंदनाये? खुदा ने इल्म बख्शा हैं आपको.
    ज्यादा क्या कहू.

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  44. क्षितिजा जी,
    इस ग़ज़लनुमा रचना में संघनित भावों का प्राचुर्य है जिसके लिए आपको बधाई दे रहा हूँ... किन्तु यह बात भी पूरी विनम्रता एवं निर्भीकता के साथ कहना चाहूँगा कि आपको ग़ज़ल कहने/लिखने से पहले बह्‌र... यानी छंद का भरपूर रियाज़ करना चाहिए।

    ऊपर दर्ज तमाम प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ आपको मुग़ालते में ढकेलने वाली हैं। इनमें से कुछेक तो ऐसे भी साथी हैं जिन्हें ग़ज़ल का कमोवेश ज्ञान भी है...फिर भी वे खुलकर अपनी बेवाक राय नहीं दे सके...कारण कि- क्यों वैमनस्य पैदा करें? आख़िर अच्छा-बुरा जैसा भी है...ब्लॉगर का निजी लेखन न है! उससे हमारे ऊपर क्या असर पड़ना है...? इसलिए केवल प्रशंसा ही लिखो...! धन्य है झूठी प्रशंसाएँ करने वाले हिन्दी के ये कतिपय ब्लॉगर्ज़!

    आपसे यह बात बतौर-ए-ख़ास कहना चाहूँगा कि जब आप मुक्‍तछंद में लिखती हैं, तब आपके लेखन में आपका एक उम्दा कवयित्री-रूप उभरकर सामने आता है। यक़ीनन मैं जितनी बार अपने इस प्रिय ब्लॉग पर आया हूँ, मैंने तमाम साहित्यिक सौन्दर्य से भरी-पूरी व उत्कृष्ट रचनाएँ देखी-पढ़ी हैं...लेकिन आज अपने इसी प्रिय ब्लॉग पर छंद की दुर्दशा देखकर निराश होकर लौट रहा हूँ! इस उम्मीद के साथ कि अगली पोस्ट में कुछ पूर्ववत्‌ सार्थक मिलेगा...!

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  45. तेरी यादों की कैद से भाग भी जाते लेकिन .....

    क्या गज़ब का शेर ... बहुत मसिमियत से लिखा है ये शेर ... वैसे पूरी ग़ज़ल गहरे एहसास जगाती है ... यादों के जंगल ले जाती है ...

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  46. @ प्रतिभा जी ... शुक्रिया
    @ कुशलेंद्र जी ... कभी कभी एक पल बहुत होता है ज़िन्दगी भर के अनुभव के लिए ... धन्याद
    @ सानु जी .. धन्यवाद
    @ विजय जी ... शुक्रिया
    @ शिखा जी ...धन्यवाद
    @ विनोद जी ... शुक्रिया आपका ...
    @ प्रियंका ... शुक्रिया ..
    @ उस्ताद जी ... ७ के लिया शुक्रिया
    @ अंजना जी .. शुक्रिया
    @ रश्मि जी ... धन्यवाद
    @ उत्कर्ष जी ... शुक्रिया..
    @ अमर जीत जी ... धन्यवाद
    @ संगीता जी ... शुक्रिया
    @ बिजेंद्र जी .. धन्यवाद
    @ अमरजीत जी ... धन्यवाद
    @ राहुल जी ... धन्यवाद
    @ दिगंबर जी ... धन्यवाद ...

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  47. @ जीतेन्द्र 'जौहर ' जी

    आप जैसे गुणी व्यक्ति ने मेरे ब्लॉग पर दूसरी बार पधारने का कष्ट किया है और इतनी बारीकी से मेरी रचनाएँ पढ़ीं हैं ... उसके लिए मैं आपकी आभारी हूँ ... धन्यवाद ..

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  48. बेहद खूबसूरत रचना
    मत पूछिये ये दिल चाक-चाक क्यूँ है
    एहसासों को पत्थर की पोशाक क्यूँ है

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  49. वाह हमेशा की तरह शानदार..........

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  50. क्षितिजा जी,
    आपकी विनम्रता को सलाम...लेकिन भूल सुधार करता चलूँ कि मैं दूसरी बार नहीं कई बार (गिनती याद नहीं) आया हूँ। हाँ...हो सकता है कि मैंने अपनी हर आमद का प्रामाणिक चिह्न (यानी टिप्पणी)न छोड़ी हो। कई बार विज़िटर रचना का लुत्फ़ लेकर उसके विचार-लोक में घूम् ही रहा होता है कि तभी अचानक घर में किसी मेहमान आदि की आमद हो जाती है...या फिर कोई ज़रूरी काम निकल आता है...है न?

    जो भी हो, आपका यह ब्लॉग मेरी पसंदीदा ब्लॉग्ज़ में आता है...एक बार पुनः आपकी विनम्रता को सलाम...फिर आऊँगा।

    ReplyDelete
  51. very nice..I like it..the words touch u deeply...

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  52. "दिमाग की डिक्शनरी में से शब्द ढूंढो ... टिप्पणी के लिए " हमेशा निशब्द हो जाता हूँ

    हाँ ..यहाँ आकर हमेशा रचनाएं पढने के बाद का हाल ये ही होता है

    वैसे भी शब्द कम ही हैं, जो हैं वो भी हाइड एंड सीक खेलने लगते हैं :))

    कभी सोचता हूँ अन्य टिप्पणियों से कुछ शब्द कोपी कर लूँ .. पर फिर सोचता हूँ टिप्पणी में मौलिकता कहाँ रह जाएगी ?:)

    @क्षितिजा जी

    वैसे तो रचनाओं पर टिप्पणी करना लगभग बंद ही कर दिया है [व्यस्त होने की वजह से ] पर आपकी पिछली पोस्ट पर आयी एक अदभुद Anonymous टिप्पणी को पढ़ कर रहा नहीं गया, चुप रहने की भी तो आदत नहीं है ना :)

    इस रचना के लिए धन्यवाद :)

    ReplyDelete
  53. वाह अच्छा लिखा है.

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  54. @ वर्मा जी ... आपका शुक्रिया इस बेहतरीन शेर के लिए ...
    @ अभियान भारतीय जी ... धन्यवाद
    @ vyankatesh ji ... thank you
    @ madhu ji ... thanks a lot
    @ काजल जी ... धन्यवाद

    ReplyDelete
  55. @ जीतेन्द्र जी ...
    ज़रूर आते रहिएगा .. आपका स्वागत है .. और आपकी टिपण्णी का भी इंतज़ार रहेगा ... धन्यवाद

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  56. @ गौरव जी .. इतना व्यस्त होने के बावजूद आपने टिपण्णी की .. उसके लिए शुक्रिया .. मैं Anonymous जी की आभारी हूँ दिल से ..

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  57. Da noice of silence irritates more than anything else.. lovely lines :)

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  58. बस उफ़ करते हुए हमने भी दोबारा पढ़ लिया इसे :)

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  59. मुझे लगता है मैं पहली बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ. आप बहुत अच्छा लिखती हैं. वैसे दर्द बेशक खूबसूरत लम्हों में ना ढल पाए लेकिन खूबसूरत लफ़्ज़ों में जरूर ढल जाता है जो आपकी गज़ल के रूप में बन के सामने आया है.

    ReplyDelete
  60. क्षितिजा जी
    अभिवादन !
    उफ़ !
    आपकी रचनाओं में मन के भाव बहुत ख़ूबसूरत ढंग से आपके शब्दों में ढल कर मुखर हो जाते हैं ।
    हर पाठक दोहरी मंत्रमुग्धता अनुभूत करता हुआ एक से अधिक बार रचना के पठन को विवश-सा हो जाता होगा … ; मैं तो अक्सर हो जाता हूं !

    इस नज़्म को भी ; जो ग़ज़ल के बहुत क़रीब आते-आते पुनः अपनी स्वाभाविक अल्हड़ता के साथ अपना मार्ग ख़ुद तय करती हुई लौट जाती है - तीन दफ़ा ज़रूर पढ़ चुका हूं ।

    यूं पूरी रचना मन को छूती है, फिर भी इन तीन चरणों को उद्धृत करने का लालच-सा है -

    इस तरह, हर ग़म से खुद को बचा रखा है
    एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है्…

    एहसास को पत्थर का लिबास… बहुत ख़ूब !

    तेरी यादों की क़ैद से भाग भी जाते लेकिन
    ये ताला हमने अपने हाथों से लगा रखा है…

    पहले कभी यादों की क़ैद का ताला जैसा बिंब पढ़ने में नहीं आया …

    आहें, सरसराहटें, सिसकियां, सरगोशियां हरसू
    उफ़! ख़ामोशी ने,तन्हाई ने, कितना शोर मचा रखा है…

    उकताहट बहुत वाज़िब लगने लगी है… शानदार !

    आपमें ग़ज़ल की बड़ी संभावनाएं लगती हैं ।
    बस, ज़रा मश्क़ , मश्वरे और मुतालए की ओर ध्यान दें ,
    मुमकिन है एक ख़ूबसूरत शाइरा से ज़माने को रू ब रू होने का सौभाग्य मिल जाए … :)

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  61. @ मोनाली जी .... आपका शुक्रिया

    @ अभी जी ... शुक्रिया

    @ अनामिका जी ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद

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  62. @ आदरणीय राजेंद्र जी

    चरणवंदना ...

    आप फिर अपना आशीर्वाद देने पधारे उसके लिए धन्यवाद ...

    आपने सही कहा ये नज़्म है जो ग़ज़ल की तरह लग रही है ... जब इस तरह की कोई रचना लिखती हूँ तो ये सोच कर नहीं लिखती की ग़ज़ल लिख रही हूँ या नज़्म लिह रही हूँ ... बस लिखती जाती हूँ जो मन में आता है ... आपकी बात का मैं ख्याल रखूंगी और मश्क़ , मश्वरे और मुतालए पर अगली बार से ध्यान देने की कोशिश करूँगी ...

    आभार

    ReplyDelete
  63. बहुत ही मार्मिक रचना
    बहुत खूब कभी यहाँ भी आये
    www.deepti09sharma.blogspot.com

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  64. गागर में सागर भर दिया है। बहुत खूब।
    डॉ. ओम
    http://flaxindia.blogspot.com

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  65. आपकी “बातें” पढ़ कर कुछ बात करने को मन हो आया. कहते हैं दिल और दिमाग दोनों की सोच अलग अलग है. आजकल लोग जो दिल में आता है वही करते हैं परन्तु दिमाग की नहीं सुनते. दिमाग को तो अच्छे बुरे की पहचान है परन्तु दिल को नहीं. सब का मानना है कि दिल तो पागल है, बेकाबू है, अपनी धुन में रहता है, जो दिल में आये सो करता है आदि आदि. यहाँ तक कि जिस दिमाग के जेरे-कंट्रोल यह दिल है उसकी भी नहीं सुनता. अगर लोग अपने दिमाग की सुनते तो शायद दुनिया में कोई भी गुनाह नहीं करता. दिल कहता है झूठ बोलो ...दिमाग मना कर देता है. अगर दिमाग की बात सुन लें तो गुनाहगार होने से बच सकते हैं. एक बार मैं तेज़ी से ऑफिस में सीढियां चढ़ रहा था कि मेरे एक सहायक ने टोक दिया, “सर, अपनी उम्र का ख्याल करते हुए अब आप धीरे से सीढ़ी चढ़ा करें.” मैंने लापरवाही से कहा “देखो भई, ये दिल और दिमाग एक दूसरे की सुनते कहाँ हैं?” मेरा दिमाग कहता है कि अब तुम बूढ़े हो रहे हो इसलिए ध्यान से धीरे धीरे सीढ़ी चढ़ो मगर ये दिल है कि मानता ही नहीं. कहता है तुम तो जवान हो बस सरपट दौड़ लो. दिल कभी चुप-चाप नहीं रहता, इसका गूंगा होना एक अजूबा ही कहा जायेगा. दिमाग फिर भी कभी शांत रह लेता है खासतौर पर तब, जब कोई इसकी बात माननी बंद कर देता है. अब लौटता हूँ आपके ब्लॉग पर ...जो एक दम मेरी सोच से अलग है. या तो मैं समझा नहीं जो आप कहना चाहती हैं या फिर आपके सन्दर्भ में आप दिल को अब बोलने का अवसर दे रही हैं जो शायद इसे पहले से दस्तियाब नहीं था. बहरहाल अब आप अपने दिल की बात सुनने लगी हैं ...अच्छी बात है. कम से कम हमें आप की बेहतरीन रचनाएं तो पढ़ने को मिलती ही रहेंगी. हज़्बे-मामूल इस मर्तबा भी मैं अनोनिमस ही रहूँ तो अच्छा है.

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  66. @ Anonymous जी ...
    वैसे यहाँ मैंने अपने दिल की बात की है ... किसी और के दिल की नहीं ... मैं तो सिर्फ अपने दिल की जानती हूँ ... और अगर इसके बारे मैं ज्यादा बोलूंगी तो एक उपन्यास तैयार हो जायेगा ... हाहाहा... वैसे मैं सोच रही हूँ अगर उस काबिल बन गयी तो ज़रूर लिखूंगी एक दिन ... :) :)... धन्यवाद आपका ...

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  67. बेहतरीन ग़ज़ल ....सभी शेर खूब बन पड़े हैं.....

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  68. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  69. baap re ... is blog par mujhe pahle ana chahiye tha. fir der se hi sahi par aane ki khushi hai.
    kitani sunder tarike se aapne dard ko rakh diya. waise kisi ek line ki prashnsa kar ke mai itani sunder nazmo ki tauhin nahi karunga par -par dil ko jo chhu gai o line hai:

    TERI YAADON KE KAID SE BHAG BHI JATE LEKIN
    YE TALA HAMNE APNE HATHON SE LAGA RAKHA HAI..

    sach me dil me sama gai...

    Bahut-2 badhai

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  70. बहुत लाजबाब पंक्तिया है सुंदर भाव का सम्प्रेषण ....ख़ामोशी के शोर को कोई- कोई सुन पाता है...और बता भी कोई- कोई पाता है.....गजब ..की बात ...शुभकामनायें
    चलते -चलते पर आपका स्वागत है

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  71. अच्छी अभिव्यक्ति. कितना मुश्किल होता है ऐसे जीना?. शुक्रिया.
    ---
    कुछ ग़मों के दीये

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  72. तेरी यादों के कैद से भाग भी जाते मगर
    ये ताला हमने अपने हाथों से लगा रखा है

    वाह क्या बात है .....!!
    सभी बहुत सुंदर शे'र हैं क्षितिजा जी ...
    अब ग़ज़ल गुरु राजेन्द्र जी कह दिया है तो सिखा भी देंगे ही ....

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  73. Kshitiaja sabse ant men aaee par wakaee najm hai ya dard kee khoobsurat chubahn. sare sher sunder tanhaee ka aur kahmoshee ka shor, gajab kee kalpana.

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  74. एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है
    रचना की शरुआत से ही
    आपकी लेखनी के पैनेपन का अंदाज़ा हो रहा है
    और फिर
    खामोशी ने , तन्हाई ने कितना शोर मचा रक्खा है
    एक दम लाजवाब .... ! वाह !!
    आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद .

    ReplyDelete
  75. बहुत ही सुन्दर भावोँ सजी हुई रचना जो मन को छू गयी HAVE A NICE DAY

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  76. क्षितिजा जी
    `एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है `
    वाह! क्या मिसरा है !
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  77. good thought process expressed in words .keep it up. I see a future sahitya academi prize winner next to my door.

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  78. Yaar tussi great ho ! inni changi shayri..bahut khoob..khush kitta iii

    rab rakha !!

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  79. बहुत प्यारी रचना है , हार्दिक शुभकामनायें !

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  80. शुरू की दोनों पंक्तियें बहुत अच्छी लगीं

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