Wednesday, December 1, 2010

लम्हे...

कुछ समय के लिए बहार जा रही हूँ ... आप सब से लगभग एक महीने बाद मुलाक़ात होगी ... जाते जाते इस पुरानी रचना फिर से पोस्ट किये जा रही हूँ ... उम्मीद है आप सब को पसंद आएगी ....


.........तुमसे मिलने के बाद,
दिल की इस बंजर ज़मीन पर,
मोहब्बत का एक पेड़ उग आया था,...
हम अक्सर उसके साए में मिला करते थे,
घंटों बातें किया करते थे,
वक्त गुज़ारा करते थे,....
लम्हे पे लम्हे इकठा होते गए,
उस पेड़ के पत्ते बनते गए,
हज़ारों लम्हों के हज़ारों पत्ते,
पेड़ घना होता गया,
और हरा होता गया,......

फिर एक दिन अचानक 
तुम्हें जाना था,.......
बस,.......जाना था,....
वो लम्हे सारे जो एक-एक कर संजोये थे,
......सब सूख गए,....
उस पेड़ से टूट गए,....
तुम उन्हें कुचलते हुए,
बेदर्दी से रौंदते हुए चलते गए,.....
हर पत्ता तुमसे कुछ कहता रहा,
चीखता रहा, चिल्लाता रहा,
रिश्तों की दुहाई देता रहा,......
लेकिन तुमने मुड़कर एक बार भी नहीं देखा,
आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया,
वहीँ, उसी ज़मीं में दफ़न हो गए,
......

.........अब वहां से कोई नहीं गुज़रता,
आज भी उस उजड़े हुए पेड़ के पास,
कुछ रोने की आवाज़ें आतीं हैं,......
कहते हैं.... 
उन लम्हों की रूहें आज भी वहाँ भटकतीं हैं......

62 comments:

  1. यह भी एक क्षितिजा वाटरमार्क कविता है घने अहसासों ,अनुभूतियों में रची बसी, सनी पगी....
    अच्छी बात तो यह कि यह कविता बन निःसृत हो ली ,नहीं तो गहरे अवसाद से रचनाकार की अस्मिता पर ही आ बनती
    लाख लाख शुक्रिया परवरदिगार का रचनाकार हमारे सामने स्वस्थ और प्रफुल्लित है :)
    कविवर जयशंकर प्रसाद ने क्या कहा था ...
    जो घनीभूत पीड़ा थी मन में छाई ...
    .....वह आज बरसने आयी .....

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  2. सुन्दर रचना...


    यात्रा के लिए शुभकामनाएँ.

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  3. awwwwwww...........
    ek to aap ja rahe ho...upar se aisi nazm....uffff

    nazm to bohot hi khoobsurat hai....aur aakhiri line to bas....qatl hai....toooooo good

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  4. @उन लम्हों की रूहें आज भी वहां भटकती हैं
    उफ्फ्फ ! क्या क्या बात है ! बेहद सरल और गहरी रचना है |
    कितनी आसानी से कितनी कठिन बात बतलाई है

    ........ बेहद सुन्दर और सरल

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  5. और हाँ .. आप जब तक वापस आएँगी तब तक हमारे ब्लॉग के पेड़ पर नयी पोस्ट की कुछ ताजा पत्तियाँ मिल सकती हैं ... आपको सारी पढ़नी पड़ेंगी :)

    आपकी यात्रा शुभ हो और सभी कार्य निर्विघ्न सम्पन्न हों .. शुभकामनायें

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  6. अभी अभी अंशुमाला जी की पोस्‍ट पर यह प्रश्‍न उठाया गया था कि ऐसे नग्‍न चित्र ब्‍लाग जगत पर नहीं दिए जाएं और आपने महिला होकर भी ऐसे चित्र लगाए हैं। शर्म का विषय लग रहा है।

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  7. मैं इस विषय में कहने से बच रहा था .....अजित जी की बात को समर्थन और आपसे इस चित्र को हटाने का अनुरोध करता हूँ

    आप मेरे कमेन्ट को भी हटा सकती हैं

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  8. बेहतरीन रचना
    सरलता से मन के गहरे भावो को शब्दो मे पिरो दिया
    यात्रा के लिए शुभकामनाये

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  9. @ अजित जी ..

    मैं माफ़ी चाहूंगी ... मुझे वो चित्र बेहद खूबसूरत और गहरा लगा था ... इसलिए लगाया था ... अगर अनजाने में मैंने आपकी भावनाओ ठेस पहुंची है तो माफ़ कर दीजियेगा ...

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  10. मैंने उन लम्हों की सिसकियाँ सुनी हैं , गौर से देखा तो खुद सा लगा

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  11. शब्दों की जादूगरनी को मेरा नमन ......
    गूढ़ भाव .....गहरी अनुभूति.......सरल शब्द ........लाजवाब अभिव्यक्ति.......मर्म को स्पर्श करती रचना .....
    आपकी यात्रा मंगलमय हो क्षितिजा जी !

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  12. @क्षितिजा जी
    बिलकुल सच्चे ह्रदय से कह रहा हूँ |
    मैं आपकी भावनाएं समझता हूँ , मुझे उस चित्र में कोई बुराई नहीं लगी |
    आप भी सोचेंगी की फिर मैंने कुछ कह ही क्यों ?
    उत्तर : मैं नहीं चाहता था की आपको किसी विवाद का सामना करना पड़े |
    तो फिर मैं कहने से बचा क्यों ?
    उत्तर :मुझे डर इस बात का था की आपको ठेस ना लगे क्योंकि जितनी नाजुक रचनाएं रचनाकार लिखते हैं उतना ही उनका ह्रदय भी संवेदनशील होता है |

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  13. @ गौरव जी .. आपका शुक्रिया इतना सब सोचने के लिए .. :) .. अजित जी ने मेरे ब्लॉग पर फिर दर्शन दे कर मुझे माफ़ कर दिया है ... इससे अछि और क्या बात होगी .. :)

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  14. @ अरविन्द जी .. धन्यवाद आप आशीर्वाद देने आये ...
    @ समीर जी ... शुक्रिया
    @ सांझ ... कोई गल नि .. " मैं तेनु फेर मिलेंगी" .. अमृता प्रीतम जी के लफ़्ज़ों में .. :)
    @ दीपक जी .. धन्यवाद
    @ रश्मि जी ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद ..
    @ कौशलेन्द्र जी .. बहुत बहुत शुक्रिया ..

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  15. उन लम्‍हों की रूहें आज भी वहां भटकती हैं .......बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

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  16. उन लम्हों की रूहें आज भी वहां भटकती हैं

    बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति।

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  17. कितने ही उम्दा तरीके से आप अपने दिल के भावो को शब्दों में पिरो कर कविता के माध्यम से कह गए. बहुत ही सुन्दर और खुबसूरत कविता. दिल को छू भी गई और दिल दुख भी गई. पुनह बधाई स्वीकार करे. फर्क मात्र इतना है की मै भी कुछ ऐसे ही भावो से गुफ्तगू करता हूँ, और आप कविता लिखती है. आपका भी मेरी गुफ्तगू में स्वागत है.
    www.gooftgu.blogspot.com

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  18. क्षितिजा जी,

    आप जिस भी मकसद से बाहर जा रही हैं.......खुदा उसे पूरा करें....आमीन

    ये इतनी सुन्दर रचना.....ये आपने कब पोस्ट की थी? मैंने तो अभी पढ़ी...बहुत खुबसूरत..... पत्तों की जुबानी मोहब्बत की कहानी....वाह|

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  19. मन की गहरी कसक को बहुत मार्मिकरूप में अभिव्यक्त करती बहुत सुन्दर प्रस्तुति..आभार

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  20. प्रेमपूरित पीड़ा की परिणित इतनी भयावह न कीजिये। कुछ वर्ष तो याद में ही निकाल देने की कविता भी रचिये।

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  21. उन लम्हों की रूहें आज भी वहां भटकती हैं ...
    दर्द , उदासी , खालीपन ...कैसा अजीब सा सूनापन लगा रहा है ...
    एहसासों से भरी कविता
    शानदार !

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  22. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (2/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  23. आह ...अहसासों से लबरेज कविता.
    बहुत ही सुन्दर.

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  24. मन के सुंदर भावों से सजी खूबसूरत रचना..... शुभकामनयें....

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  25. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..अंतिम पंक्ति तो बस कमाल की ...

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  26. क्षितिजा,
    अपनी भाषा में कहूं तो.... लिल्लाह! वल्लाह! माशा'अल्लाह!
    आशीष
    ---
    नौकरी इज़ नौकरी!

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  27. मन की भावनाएं बड़ी ही खूबसूरती से उभरी हैं !
    कविता गंभीर मगर सम्प्रेषण पूर्ण है !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  28. उस लम्हे की रूहों से जुड़कर दो बूंदे म्री स्मृति में भी टपक गई। धन्यवाद, कहीं यूं ही अचानक जोड़ देने के लिए।

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  29. बहुत सुन्दर.......

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  30. दिल की गहराई से उपजी एक श्रेष्ठ कविता।

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  31. bahut sunder rachna ...dil k bahut kareeb se gujri ..apko pehli baar padhna acha laga :)

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  32. बहुत मार्मिक रचना जो किसी भी दिल की जमीन को गीला करने के लिए काफी है.

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  33. पहली बार आया और मन मोह लिया आपकी रचनाओं ने... आंसू है, मुस्कान है, इश्क है और जुदाई का गम भी... किन्तु मधुरता है... एक नजाकत है... बेहतरीन

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  34. रचना तो वास्तव में बड़ा मार्मिक है ।

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  35. आप की रचना तो वास्तव सर्वोन्मुखी है,
    सुन्दर रचना

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  36. दिल कि गहराइयों से निकली कविता.
    सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  37. फिर आयेंगी कोपलें, नये पत्‍ते और हरियाली और अब की फूल भी खिलेंगे.

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  38. awaj dekar bulate hai ..ab to intzaar hi hai...

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  39. I am back.... how are you? Hope you will be fine... Read out this poem... touched to the core of the heart... anagrammatically... beautiful.... hope will see new post very soon....


    Regards...

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  40. Good Morning.Bahut hi tarike se aapne aapne bhaon ko prastut kiya hal.Ek sher hai-
    Muhabbt ke liye kuchh khas dil makhsus hote hai,
    ye woh nagma hai jo har saaj par gaya nahi jata.PLz. visit my new post.

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  41. क्षितिजा जी

    हम इंतज़ार करेंगे … … …

    वैसे ब्लॉग जगत के लिए आपका बिछोह बहुत कष्टप्रद होगा इतना ध्यान रहे… :)

    … और रचना पहले पढ़ ही चुका हूं । एक बार और पढ़ कर फिर उन्हीं अनुभूतियों का स्पर्श पाया ।

    शुभकामनाओं सहित …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  42. kya khoob likha hai ji... padhkar man kahi ruk sa gaya hai .. bahut bahut badhayi ho aapko .....

    vijay
    poemsofvijay.blogspot.com

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  43. सुन्दर रचना....
    ______________
    'पाखी की दुनिया' में छोटी बहना के साथ मस्ती और मेरी नई ड्रेस !!

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  44. मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
    कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

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  45. अच्छी सुंदर रचना
    मेरे ब्लॉग में SMS की दुनिया

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  46. बहुत अच्छी रचना
    बहुत - बहुत शुभकामना
    --

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  47. jis tarha shakh se tode huya ek patte ka rang
    maand pad jaata he kuch roz alag saakh se rehkar

    shakh se tut kar ye dard jiyega kab tak
    khatm ho jayegi jab iski rasad to timtimayega jara der tak buzte buzte!!

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  48. नमस्कार जी,
    बहुत ही अच्छी,सुंदर प्रस्तुति

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  49. bahut hi sundar..

    mere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
    Lyrics Mantra

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  50. क्रिसमस की शांति उल्लास और मेलप्रेम के
    आशीषमय उजास से
    आलोकित हो जीवन की हर दिशा
    क्रिसमस के आनंद से सुवासित हो
    जीवन का हर पथ.

    आपको सपरिवार क्रिसमस की ढेरों शुभ कामनाएं

    सादर
    डोरोथी

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  51. बेहद खूबसूरत लिखा है!
    उम्दा रचना!!

    .


    आपको एवं आपके समस्त परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामाएं!!

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  52. दिल की गहराईयों को छूने वाली एक खूबसूरत, संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  53. kalam khoobsurti se chalti rahe.navvarsh ki hardi shubhkamnayen

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  54. आज १ महीने २ दिन हो गए...आपका इंतज़ार है..नव वर्ष की शुभकामनाएं....

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  55. कमाल की रचना क्षितिजा जी...वधाई!!!!!!

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  56. dil ko chhu gai aapki ye rachana,baki tarif to auro ne kar hi di hai ab hamare paas kuchh alag nahi kahne ke liye.keep it up.....

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  57. बेहद खूबसूरत रचना ...ऐसा लगा ..मैं सही जगह सही समय पर पहुंची ..संतुस्ती हुई मन को .

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