Saturday, January 8, 2011

एक बर्फ-ज़दा समंदर ...

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं .....











कुछ पल क्षितिज पर ठहर कर 
मानो पूछ रहा हो मुझसे -......
  "कब तक तड़पता रहूँगा, जलता रहूँगा ....
    अपनी ही आग में ........
    क्या तुम्हारे पास भी मुझे चैन नहीं मिलेगा...
    बिना बुझे.............अंगारों में लिपटे 
    क्या आज भी मैं यूँ ही लौट जाऊँगा..."

काश! कहीं से मिल जाता एक बर्फ-ज़दा समंदर .....
क्षितिज को छूता हुआ, शीशे सा, जमा हुआ............
और मैं साहिल को पीछे छोड़ 
सर्द लहरों का हाथ थाम कर ..............
चल दूं नंगे पांव इस कांच के सपने पर
बर्फ की सारी ठंडक, उसकी तासीर .....
अपने में जज़्ब करती हुई..................
अपने सूरज से मिलने की धुन में मगन 
उस में खोई हुई..................................

पहुँच कर उसके पास बिना कुछ कहे
बढ़ा दूँगी अपना हाथ...........
बस एक बार छू लेने को उसे............
करीब जा कर रख दूँगी 
अपना बर्फ़ सा पाँव.........................
उसके जलते सुलगते सीने पे .........
........या तो मैं बुझा दूँगी उसकी आग
या मैं भी जल जाउंगी उसकी आग में ... 

................... तुमने बताया था एक बार 
तुम्हारे शहर में होते हैं ऐसे समंदर........
इस बार जब आओ तो साथ लेते आना...
...................शायद ये ही एक रास्ता हो 
जो तुम तक पहुँचता हो ......................

80 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति

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  2. मनोभाव को एकदम नये शब्दो से संजोया है।

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  3. welcome back in blog world .happy new year 2011 to you &ypur family .prastut kavita me bhavon ko bahut hi sundarta ke sath sajaya hai .badhai.

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  4. बेहतरीन!

    आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

    सादर

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  5. आदरणीय क्षितिजा जी
    नमस्कार !
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

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  6. नए साल की आपको सपरिवार ढेरो बधाईयाँ !!!!

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  7. nav varsh ki aapko bhi bahut saari shubhkamnayen:)

    bahut pyari kavita...

    samandar ki maang karna bha gaya..:)

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  8. aamantran hamare blog pe chatka lagane ke liye...:)

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  9. बर्फ के ऐसे समन्दर सब पिघल चुके हैं लोगों के जलते हृदय अभी भी जल रहे हैं।

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  10. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति, मगर बड़ी सर्द की सी अनुभूति हो गयी. वैसे भी मेरे शहर में इतनी ठण्ड और बरफ है कि अति हो गयी है..आज सुबह से ही बरफ पद रही है और तापमान -२० डिग्री हो गया. है.....
    कविता बहुत अच्छी लगी.
    आपको भी नव वर्ष की शुभकामना.
    सुमन श्रृष्टि की भावनाओ से भी रूबरू होइए: http://sristisankalp.blogspot.com/

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  11. उफ़ ! कितना दर्द है फिर भी कुछ बर्फ़ कभी नही पिघलतीं।

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  12. क्षितिजा जी, सबसे पहले तो मेरी और से नववर्ष और मन को छूने वाली एक सुन्दर कविता लिखने पर बधाई स्वीकार करें. इसके पश्चात कहना चाहूँगा की आपके ब्लॉग का अनुशरण करना इसीलिए शुरू किया था की आपके पास जो शब्द है वो मुझे कहीं नहीं मिलते. सुन्दर लेखन.

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  13. इस भावपूर्ण रचना के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  14. bahut sundar.vapsi aapki kavita ne aur sukhad kar di.kabhi mere blog par bhi aayen[http://shalinikaushik2.blogspot.com]
    nutan varsh shubh aur mangalmay ho.

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  15. मुहब्बत के सुलगते पांव लिए समंदर में डूबती उतरती नज़्म .....

    बहुत खूब .....!!

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  16. मनोभाव को एकदम नये शब्दो से संजोया है। हार्दिक बधाई|

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  17. सुलगते समुन्दर में भी आग लग जायेगी इन बर्फीले पाँव से ... बहुत गहरी नज़्म ...
    आपको और परिवार में सभी को नव वर्ष मुबारक हो ..

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  18. बहुत ही प्रभावशाली प्रस्तुति

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  19. क्षितिजा जी, आपके लफ्जों के तीर देखकर हतप्रभ हूं। कहां से लाती हैं आप इतने प्‍यारे प्‍यारे बिम्‍ब।

    ---------
    पति को वश में करने का उपाय।

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  20. बहुत सुंदर भाव
    नव वर्ष की आपको और आपके परिवार को बहुत बहुत बधाई हो

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  21. नए वर्ष पर शुभकामनायें !

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  22. बहत सुंदर //
    मेरे ब्लॉग पर भी आये //
    http://babanpandey.blogspot.com

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  23. बहोत दिनों बाद एक सुन्दर कविता नज़रों से होकर गुज़री है जिसके लिए निसंदेह आप बधाई की पात्र हैं

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  24. ifu have face book account so send me requst on my mail myanklet@gmail.com

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  25. बेहतरीन लिखती हैं आप।

    जितने गहरे भाव हैं उतने ही अनूठे प्रतीक भी हैं।

    आपकी रचनाशीलता को नमन।

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  26. भावो और शब्दों के सहज मिलन ने अभिव्यक्ति को उत्तमता प्रदान की है . नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये .

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  27. :)gam is baat ka nahi ki aap der se aaye , khushi is baat ki hai ki aap aaye to sahi.. bahut shukriya aapke comment ka .. aate rahiyega..


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  28. छुट्टियों के बाद आपका स्वागत है क्षितिजा जी...
    आपको भी नए साल की शुभकामनाएं
    बहुत ही अच्छी कविता से साल का आगाज़ किया है आपने........

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  29. राह पकड़ तू ऐ चला चल पा जाएगा ...

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  30. सारगर्भित सुन्दर रचना.
    नए वर्ष की हार्दिक बधाई आपको.

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  31. aapko bhi nav varsh ki shubhkaamna.....

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  32. आपकी काल्पनिक उड़ान अच्छी लगी।आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  33. नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
    बहुत खूबसूरत लिखा है |बधाई
    आशा

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  34. सबसे पहले तो स्वागत है आपका ब्लॉगजगत में वापस आने का......बहुत देर कर दी मेहरबां आते....आते.....:-)

    शानदार लगी आपकी ये नज़्म....बहुत खूबसूरती से आपने बर्फ और आग का इस्तेमाल किया है .....शानदार......आपको और आपके परिवार को नववर्ष की शुभकामनायें ......देर आयद दुरुस्त आयद :-)

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  35. बहुत सुन्दर क्षितिज जी

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  36. बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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  37. मेरे लेवल के ऊपर की बात है....
    आशीष
    ---
    हमहूँ छोड़ के सारी दुनिया पागल!!!

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  38. बहुत मर्मस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति ...नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

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  39. बाप रे -यहाँ तो पहले से ही ठण्ड है -उपर से बर्फ के समन्दर की बात !
    इन दिनों तो बात अन्तराग्नि की हो ! शोले भड़कें तब तो कोई बात बने !
    मजाक के इतर कविता अच्छी है !

    ReplyDelete
  40. बाप रे -यहाँ तो पहले से ही ठण्ड है -उपर से बर्फ के समन्दर की बात !
    इन दिनों तो बात अन्तराग्नि की हो ! शोले भड़कें तब तो कोई बात बने !
    मजाक के इतर कविता अच्छी है !

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  41. aapka blog-description padha..kaafi interesting hai..aur aapki kavita bhi. Congrats!

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  42. एहसास का स्वर

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  43. खूबसूरत अभिव्यक्ति..
    आप को नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं...

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  44. बर्फ के पर्वत अहसासों की गर्मी से पिघल जाते है ,सुंदर रचना के लिए साधुवाद

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  45. हर शब्द ने खामोश कर दिया है मुझे ....किस तरह सोचूं तुझे ...किस तरह पाऊं तुझे ..
    .हर एक शब्द लाजबाब ..बहुत दिनों बाद आपकी कविता पढने को मिली ..लेकिन दिल पर असर कर गयी ..शुक्रिया आपका

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  46. hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii :) :)

    kaise ho...looong time, kaisi rahi vacations....happy nu year :)

    bohot bohot pyaari nazm hai....aur kya khayaal hai, bohot khoobsurat hai...tooooo good, missed u yaara :)

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  47. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  48. बहुत भावपूर्ण सुन्दर कविता
    अच्छा लगा पढना
    आभार

    शुभ कामनाएं

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  49. जय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!

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  50. क्षितिजा जी ..सुन्दर मर्मस्पर्शी रचना.. .. .. आज चर्चामंच पर आपकी पोस्ट है...आपका धन्यवाद ...मकर संक्रांति पर हार्दिक बधाई

    http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/blog-post_14.html

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  51. लोहड़ी और मकर संक्रांति की शुभकामनायें

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  52. xitijaji bahut sundar kavit ke liye aur makar sankranti ke parva par aapko badhai/shubhkamnayen

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  53. क्षितिजा जी, वैसे तो मैं ब्लोग की दुनिया को अलविदा कह चुका हूं लेकिन आपकी रचनाओं को पढता रहता हूं.. आपकी कविताओं में एक प्यासी पुकार है,खामोशी की रूदन है..

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  54. Xitijaji Bahut sunder Rachna.....
    Makarsankranti ki bahut-bahut Shubhkamnayen...

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  55. @ क्षितिजा जी..
    ब्लॉग पढने और ब्लॉग से जुड़ने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

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  56. हूँ म म म ....! पूरे एक माह बाद वापस आयीं हैं आप .....बहुत अच्छे प्रतीकों के साथ ....हमेशा की तरह ....सूरज को दी गयी चुनौती में आपका गजब का आत्म विश्वास झलकता है.....इसे बनाए रखियेगा......ज़िंदगी को इसी की ज़रुरत रहती है

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  57. क्षितिजा जी,

    बहुत अच्छी कविता पढ़ी प्रश्न उठाती हुई और छोड़ देती है पाठक को अपनी ऊहापोह में कि तलाशना ही होगा एक संमदर अपने लिये।

    वो समंदर की तलाश ही शायद जीवन है.....खोजिये कहीं आस-पास ही होगा।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  58. "या तो मै बुझा दूंगी उसकी आग या मैं भी जल जाउंगी उसकी आग में......"
    बहुत ही प्रभावी अभिव्यक्ति ....hats off

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  59. बहुत खूब लिखा आपने...सुंदर रचना...बधाई

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  60. bahut khubsurat abhivyakti
    bdhai dost

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  61. अच्छी कविता बन पड़ी है.बिम्बों से भरी शशक्त कलम है आपकी.हिमाचल से सलाम.

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  62. अजी सिर्फ सुन्दर नहीं, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति!

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  63. सुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली ।
    भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
    बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।
    हिन्दी को ऐसे ही सृजन की उम्मीद ।

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  64. क्षितिजा जी,
    भावनाओं को मुखरित करने में आपका जवाब नहीं !
    _ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  65. good poem for winters to experience the warmth one always aspires for ............keep it up

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  66. दिल भर आया आपकी पोस्ट पढ़ कर.....ऐसा कम ही होता है....!!!
    पढ़कर एकदम से लगा.....इन रेशमी राहों में.....इक राह तो वो होगी.....तुम तक जो पहुँचती है....उस मोड़ से आते हैं.....!!

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  67. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति क्षितिजा जी..

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  68. nice post..blog par aaker achaa laga..

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  69. Hi Kshitija,

    Awesome creation... While reading this poem, I hv goosebumps... dont know why... may be I find it close to my heart...

    Keep writing... :) :)

    Regards,
    Priyanka.

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