Tuesday, January 25, 2011

खिलौने वाला .....





















....एक खिलौना बनाने वाले ने
कितने ही खिलौने बनाये हैं  ...


....अलग अलग रंग के
अलग अलग रूप के
अलग अलग कद काठी के ....

......कुछ सोने के
कुछ भूसे के बने हैं ...
कुछ कच्चे, कुछ पक्के हैं ...

....कहीं कोई मखमल में लिपटा है
तो कोई चीथड़ों से ढका है....
किसी के हाथ में चाँद है
किसी का मिट्टी से सना है ....
कुछ की बगल में खंजर रहते हैं
कुछ के नाज़ुक पतले गले हैं ...
किसी  के सर पे दस्तार सजे हैं
तो कुछ उनके आगे झुके हैं ...

.... अनगिनित हैं बेशुमार हैं
उसके आँगन में बिखरे पड़े हैं ....


... तजुर्बे पे तजुर्बे करता रहता है
खिलौने ही खिलौने बनाता रहता है
चाबी घुमाता रहता है
खेलता रहता है ....

36 comments:

  1. This comment has been removed by the author.

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  2. बहुत खूब , लाजवाब लगी आपकी ये अभिव्यक्ति । बहुत-बहुत बधाई सुंदर कविता के लिए ।

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  3. सुन्दर....खिलोने बनाने वाला भी खूब है....और उसके सोच भी.....खुद खिलोने बना के खेलता भी रहता है...

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  4. उस रब को याद करने के कितने तरीके हैं.आप की काव्यमयी प्रस्तुति के लिए बधाई

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  5. क्षितिजा जी,

    सुभानाल्लाह......सुन्दर बिम्बों का इस्तेमाल किया है आपने.......दर्शन का फलसफा बयां करती पोस्ट है ये आखिरी में मात्रात्मक गलती हैं हो सके तो दुरुस्त कर लें.......शुभकामनायें|

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  6. वाह क्या बिंब है
    आपकी कविता की जितनी तारीफ की जाये कम है।
    शुभकामनाये

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  7. क्षितिजा जी ! लम्बे समय के बाद आपसे रू-ब-रू हो रहा हूँ. दर्शन को कविता में उतारना अच्छा लगा, कृपया सुधार कर लें - "चाबी घुमाता रहता है"

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  8. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  9. पहले भी कहा है… फिर कहता हूँ, मेरे शब्दों का सामर्थ्य नहीं इनकी प्रशंसा लायक। सो बहुत सी शुभकामनायें।

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  10. zindagi kee baaten batata hai ... kai rangon me kai roopon me

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  11. सुंदर बिम्ब ....खिलौने बनाए वाले की सोच भी ठहरती कहाँ है.....

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  12. खिलौने बना कर डोर अपने ही हाथ में रखता है यह खिलौने वाला ...अच्छी प्रस्तुति

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  13. ये खिलौने बनाने वाला भी बहुत बड़ा कारीगर है.
    आपकी सुन्दर-सी रचना पढ़कर किसी का एक शेर याद आ गया :-

    कोई समझा नहीं ये महफिले-दुनिया क्या है ?
    खेलता कौन है और किसका खिलौना क्या है??

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  14. सुन्दर बिम्ब प्रयोग के साथ आपने तो आज ऊपर वाले को भी लपेट लिया…………सहीकहा चाबी घुमाता है और सबको नचाता है ये खिलौने वाला।

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  15. ऊपर वाला पाँसे फेके, नीचे चलते दाँव।

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  16. क्षितिजा जी, खिलौनेवाले के बहाने आपने बडी गहरी बातें कह दीं। बधाई स्‍वीकारें इस सार्थक रचना के लिए।

    -------
    क्‍या आपको मालूम है कि हिन्‍दी के सर्वाधिक चर्चित ब्‍लॉग कौन से हैं?

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  17. अब कौन उस लीलाकार से पूछे कि वो क्यूं ऐसे खेल करता रहता है -तरह तरह के खिलौने बनाना और उन्हें तोड़ भी देना उसका प्रिय शगल है -
    इस दार्शनिक सत्य को कविता के माध्यम से आपने अच्छा उकेरा है !

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  18. Bahut khoob!
    Gantantr diwas kee haardik badhayee!

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  19. बहुत प्रेरणा देती हुई सुन्दर रचना ...
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  20. "तजुर्बे पे तजुर्बे करता रहता है
    खिलौने ही खिलौने बनाता रहता है
    चाबी घुमाता रहता है
    खेलता रहता है ...."

    क्या बात है ... बहुत खूब
    आखिर उसको भी दिल बहलाने को कुछ तो चाहिए न
    सुन्दर रचना
    बधाई

    गणतंत्र दिवस की मंगलकामनाएं

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  21. आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
    सादर
    ------
    गणतंत्र को नमन करें

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  22. तजुर्बे पे तजुर्बे करता रहता है
    खिलौने ही खिलौने बनाता रहता है
    चाबी घुमाता रहता है।

    हर रचनाकार को यह करना पड़ता है।
    सुंदर भावमयी रचना के लिए धन्यवाद, क्षितिजा जी।

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

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  23. क्षितिजा जी, आपकी कविता सच्चाई को ऐसे ढंग से खोजती / बखानती है कि वह अपनी आत्मीय और अंतरंग अद्वितीयता तुरंत स्थापित कर लेती है | बधाई और शुभकामनाएँ |

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  24. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें

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  25. बहुत ही अच्छी कविता है... और एक गूढ़ बात को इस तरह कहने का अंदाज अनूठा है...

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  26. तुमको तो करोड़ों साल हुए बतला ओ गगन गंभीर
    इस प्यारी-प्यारी दूनियाँ की क्यों अलग अलग तस्वीर ....?

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  27. bahut sundar kavita padhne ko mili.aapko bahut bahut shubhkamnayen

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  28. ishwar ko samjhaane ke liye acchi upma chuni hai aapne....badhai///acchi nazm

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  29. ऊपरवाला भी तो यही कुछ करता है ... लाजवाब रचना है ...

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  30. Maine Jab Se Tumko Dekha Hai Aisa Lagta Hai Bus Tu Hi Tu Hai. Thank You For Sharing.

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