Friday, January 28, 2011

एक पल... एक ज़िन्दगी...

















...तुम्हारे लिए... सिर्फ एक पल
मेरे लिए... एक ज़िन्दगी...

...जितने पल तुमने मेरे साथ गुज़ारे हैं
उतनी ज़िंदगियाँ मैंने जीं हैं...

...न जाने कितनी बार मैंने जन्म लिया
जाने कितनी बार मैं मरी हूँ...

...पिछली बार जब तुम गए थे
वो आखरी बार था जब मैं मरी थी...

...उस दिन के बाद तुम लौटे
मैं जिंदा हुई...

...एक जिस्म है जो साँसे ले रहा है
राख़ होने का इंतज़ार कर रहा है...

77 comments:

  1. "ना लौटा सकोगे कभी चाहत मेरी..
    ना मिटा सकोगे कभी इबादत मेरी..

    ...अक्स हूँ जुदा हो जाऊं..मुमकिन नहीं..!!"

    ...

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  2. bahut hi sundar abhivyakti ..

    kavita me ek kasak hai ji ..

    badhayi

    vijay
    pls read my new poem on poemsofvijay.blogspot.com

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  3. Super Duper Like..I am in love with your poetry

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  4. वाह-वाह क्या बात है, भावमयी प्रस्तुति बढिया लगी ।

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  5. बहुत ही बढ़िया अभिव्यक्ति है.

    ....उस दिन के बाद न तुम लौटे
    न मैं ज़िंदा हुई....

    आपकी कलम को ढेरों शुभ कामनाएं .

    मीना कुमारी जी की तस्वीर देखकर लगता है जैसे आपने यह कविता उनके लिए ही लिखी हो .उनका जीवन भी आप की इस कविता के जैसा था.

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  6. ओह! क्षितिज़ा गज़ब कर दिया…………कितना दर्द और कसक भर दी है चंद लफ़्ज़ों मे ही…………बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  7. बहुत सुन्दर एवं सारगर्भित अभिव्यक्ति
    शुभकामनाये

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  8. शब्द नहीं क्षितिजा जी! तारीफ़ के लिए.
    बहुत ही दर्द भरी और दिल को छू जाने वाली पंक्तियाँ लिखी हैं आपने.

    सादर

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  9. क्षितिजा जी
    सादर प्रणाम
    कविता बहुत मार्मिक भाव को अभिव्यक्त करती है ....आपका लिखने का अंदाज बहुत जुदा है ....शक्रिया

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  10. क्षितिजा जी
    इसे भी संयोग ही कहें कि आज मैंने भी कुछ इसी तरह कि कविता लिखी है ... "जिन्दगी है एक दिन " .....आपका स्वागत है ....आशा है आप अपनी टिप्पणी से अनुग्रहित करेंगी ....शुक्रिया आपका

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  11. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  12. बहुत सुन्दर कविता लिखी है
    ऐसे भाव, कि सीधे मन मे उतर गये
    ढेर सारी बधाई स्वीकार करें

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  13. बहुत खूब
    दर्द भरी और दिल को छू जाने वाली पंक्तियाँ लिखी हैं
    कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपनी एक नज़र डालें

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  14. गहन भावों को संजोये हुए नारी मन की व्यथा का सटीक चित्रण किया है .सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

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  15. ek behtareen rachna...jo bahut marmik hai..:)

    ek nivedan: mera blog jindagikeerahen.blgospot.com pata nahi kahan gumm hoga, agar aap iske revive ke liye koi suggestion de sakte hain, to bahut kripa hogi..!!

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  16. कितना दर्द और कसक ....बहुत मार्मिक और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति..बहुत खूब..

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  17. @ mukesh kumar sinha ji

    maaf kijiye mujhe iske baare mein koi jaankari nahi hai ... aap kisis visheshagya se salaah le lijiye ... dhanyawaad

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  18. क्षितिजा जी
    बहुत ही दर्द भरी और दिल को छू जाने वाली पंक्तियाँ लिखी हैं आपने.

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  19. ओह, मार्मिक पंक्तियां हैं।

    बहुत अच्छा लिखा है आपने।

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  20. एक जिस्म है जो सांसे ले रहा है, राख होने का इंतजार कर रहा है
    बहुत ही बहुत बढ़िया !

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  21. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार 29.01.2011 को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    आपका नया चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  22. This is my first visit to your blog and am impressed with the feelings and expressions.

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  23. दर्द को समेटे खूबसूरत रचना ..

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  24. एक साधारण सा नियम है, wala app ki writing atchhi lagi nice

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  25. तुम्हारे पल पल में बसी मेरी जिन्दगियाँ। बहुत ही सुन्दर।

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  26. बहुत सुंदर .... मन के मर्म की प्रभावी अभिव्यक्ति....

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  27. Zindagi ka palon men tut kar bikhar jaane ka bahut hi gahara dard ukera hai aapne.
    Sundar abhivyakti ke kiye shukriya

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  28. एक पुरानी ग़ज़ल के चाँद लाइन याद आ गयी...
    "वक्त सारी जिन्दगी में दो ही गुजरे हैं कठिन
    एक तेरे आने से पहले एक तेरे जाने के बाद."
    बहुत अच्छा लिखा

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  29. xitija ji bahut sundar bhavon se saji kavita ke liye aapko badhai aur shubhkamnayen

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  30. awww.....very very touching.....luv u yaara

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  31. priya akanksha ji

    namskar ,

    rachna ka samveg samvedanshilata ki gaharayiyon
    ko chhuta hua . bhavmayi prastuti .badhayian.

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  32. priya kshitija ji,

    mafi chahata hun ,sambodhan men kshitija
    ki jagah ,akanksha likh gaya .kshitija pada jaye .

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  33. पिछली बार जब तुम गए थे तब आखिरी बार मरी थी मैं... बेहतरीन भावाभिव्‍यक्ति। रचना में दर्द है, मर्म है और है प्‍यार की इंतहा।

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  34. एक जिस्म है जो सांसें ले रहा है,
    राख होने का इन्तज़ार कर रहा है।

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई।

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  35. इस बार आपकी कविता का रूमानी पक्ष उभर कर सामने आया है.
    Photo is matching with the thoughts hidden therein.

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  36. क्षितिजा जी , बहुत ही गहरे जज्बात के साथ दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति....... सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  37. क्षितिजा जी,

    सुभानाल्लाह......बहुत गहरे कहीं चोट कर दी है आपने......मीना कुमारी जी की ये तस्वीर आपकी पोस्ट में चार कहंद लगा रही है.......बहुत ही खुबसूरत पोस्ट.....बधाई आपको|

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  38. क्षितिजा जी ऐसा क्यों होता है कि आपकी कवितायें एक केयर सालीसिटिंग रिस्पांस उद्भूत कर देती है -बहत गहन भावनाओं और वियोग श्रृंगार से आप्लावित ..यह कविता भी पाठकों को कविमन से सानिध्यता को आमंत्रित करती है!
    कुछ गलत तो नहीं कहा ?:)

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  39. kahee hui baat hai par dobara sunna accha laga ...gud one... :)

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  40. बहुत अच्छी रचना....भाव,प्यार और उसका दर्द....बहुत खूब

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  41. सिर्फ़ यही तो नही है नारी जीवन का सच......उत्तिष्ठ कोन्तेय....

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  42. वाह क्या बात है..
    बेहतरीन भावाभिव्यक्ति...

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  43. सुन्‍दर प्रयास.

    फालोवर्स आपके हमसफर हैं उनके लिये वहां 'सहायक' का प्रयोग मुझे उचित प्रतीत नहीं होता, आप कविता लिखती हैं, आपके पास तो शव्‍द भंडार है। शव्‍दों से ही तो भाव, बिम्‍ब और आपकी निजी शैली से परिपूर्ण अक्षर कविता की सीढि़यों में पांव धरती है।

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  44. "ये पल ऐसे ही होते हैं....
    कोई किसी के होने से मरता है,
    कोई किसी के ना होने से.."

    बहुत सुंदर प्रस्तुति क्षितिजा जी.

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  45. ...पिछली बार जब तुम गए थे
    वो आखरी बार था जब मैं मरी थी...

    ...उस दिन के बाद न तुम लौटे
    न मैं जिंदा हुई...
    dar sa gaya mai padhkar ise.... shabd nahi tarif ke liye.

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  46. kya kahu , ye soch rahi hun
    bahut hi dil k karib lagi
    aap kanpur mi hai ye jan kar achchha laga
    kabhi milne kaa program banaiye

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  47. प्रेम के अनन्य पल मन के किसी कोने रच- बस जाते हैं।भावपूर्ण पोस्ट।

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  48. sirf ek pal... kaafi hai... mujhey jinda rakhney key liye...

    Behad khoobsurat rachna...

    Thanks for sharing :)

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  49. गहरी नज़्म है ... जिंदगी के कई पन्नों को उकेर कर लिखी गयी नज़्म ...
    बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति है क्षितिजा जी ...

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  50. भावनाओ का खुबसुरत चित्रण। कभी वक्त मिले तो हमारे ब्लाग पर भी पधारे। शुक्रिया।

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  51. देरी से आने के लिए क्षमा प्रार्थी हू. सारा दर्द उंडेल दिया है कविता में... दिल को छूने वाली खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  52. sunder aur bhavpurn rachna k liye badhai sweekar karein .....

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  53. आदरणीयाxitija ji बसंत पर आपको हार्दिक शुभकामनायें |

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  54. आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
    सादर,
    डोरोथी.

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  55. hellooooooooooooooooooooooooooooo...............

    kahan ho yaara....missing u....jaldi aao aur kuch likho..................

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  56. क्षितिजा जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    पिछली बार जब तुम गए थे …
    संवेदना स्वयं साक्षात् सम्मुख प्रतीत हो रही है … साधु !
    बहुत तबीअत से लिखती हैं आप !

    बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  57. मन के मर्म की प्रभावी अभिव्यक्ति|आभार|

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  58. कितना आसान है तारीफ करना और कितना मुश्किल है दर्द को शब्द देना !

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  59. ब्लॉग लेखन को एक बर्ष पूर्ण, धन्यवाद देता हूँ समस्त ब्लोगर्स साथियों को ......>>> संजय कुमार

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  60. क्षितिजा जी, कितनी दर्दभरी कविता है । तुम्हारे लिये एक पल मेरे लिये इक जिंदगी । स्त्री के जीवन का दर्शन कह जाती हैं ये पंक्तियां ।

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  61. प्रिय क्षितिजा जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    बहुत दिन हो गए , पोस्ट बदले हुए …
    कहीं ब्लॉग पर भ्रमण-विचरण करते भी मुलाकात नहीं हुई …
    सब कुशल मंगल तो है ?
    आशा है, सपरिवार स्वस्थ-सानन्द हैं !

    नई पोस्ट बदलें तो कृपया, मेल द्वारा सूचित करने का कष्ट करें …
    ♥ बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !♥

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  62. दर्द भरे एहसास बयाँ करती रचना |
    बहुत खुबसूरत रचना |

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  63. बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.. चंद पंक्तियों में बहुत कुछ कह दिया.........
    रंगपर्व होली पर आपको व आपके परिवार को असीम शुभकामनायें......

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  64. बहुत खूब सुन्दर पोस्ट के लिए
    बधाई ......

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  65. जितने पल तुमने मेरे साथ गुज़ारे हैं
    उतनी ज़िंदगियाँ मैंने जीं हैं..
    un jiye har pal ko kaleje se lagaaye man hi man dohraate .. budbudaati ladki ...prem ko maan dena hi ibadat hai ... yahi paegaam deti sundar rachna ..
    shreshtha lekhan hetu bahut badhaai !!

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  66. This is a fantastic write though i am not great with hindi. you write really well.

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  67. marmik prastuti........dard jab shabdo me badal jaate hai to har dil ko chute hai

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  68. बहुत अच्छा लिखा है आपने।

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