Saturday, May 7, 2011

सलीब...

आप सब को मेरा प्रणाम... कुछ वक़्त से ब्लॉग्गिंग नहीं कर प् रही हूँ .. उसके लिए आप सब से माफ़ी चाहूंगी ... पहले typhiod हो गया था... अब पढाई में व्यस्त हूँ ... कुछ और समय के लिए आप सब से गैरहाज़िर रहने की इजाज़त चाहूंगी... आप सब  के सहयोग और स्नेह के लिए आभारी हूँ  ... बहुत बहुत धन्यवाद... 








अपनी सलीब अपने कांधों पे लिए होते हैं
ऐसे कुछ साज़-ओ-सामां रिहाई के होते हैं

तनहाइयों के सेहरा फांकते रहे कब से
सराबों ने खून और जलाया मेरा सराबों = मृगतृष्णा ]
ये साजिशों भरे बेरहम मंज़र 
कब क़ैफ़-ओ-क़रार के होते हैं... [कैफ़-ओ-क़रार = ख़ुशी और संतुष्टि ]

गुनेह्गारों की मानिंद खड़े हैं हम 
इन रवायतों के कठ्घरों में
दुनियावाले क्या समझेंगे इन्हें 
कुछ फैसले खुदा के होते हैं... 

पिघले मोम की तरह उतरे तेरे सांचे में
तेरे नज़रिए से खुद को तराशते गए 
उन्ही सोज़-ए-लम्हों में वजूद मेरा कायम है [सोज़ = जलना, प्रेम ]
जो लम्हे तेरी पनाह के होते हैं...

अपनी सलीब अपने कन्धों पे लिए होते हैं
ऐसे कुछ साज़-ओ-सामां रिहाई के होते हैं




62 comments:

  1. बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति दी है आपने।

    आप खुशी से अपने कार्य निपटाएं, और सेहत का ख्याल रखें। ब्लॉगिंग तो फिर होती रहेगी।

    शुभकामनाएँ!!

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  2. Welcome back! Bahut sundar rachana!

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  3. बहुत अच्छा लिखा आपने.

    सादर

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  4. ग़ज़ब की नज़्म। कई-कई बार पढ़ गया हूं।

    पिघले मोम की तरह उतरे तेरे सांचे में

    तेरे नज़रिए से खुद को तराशते गए

    उन्ही सोज़-ए-लम्हों में वजूद मेरा कायम है

    जो लम्हे तेरी पनाह के होते हैं...
    आप पूरी तरह स्वस्थ हो लें, परीक्षा भी आपकी बहुत अच्छी हो, भगवान से यही प्रार्थना है।

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  5. क्षितिजा.............बड़े दिन सेआपका लिखा हुआ पढ़ने की इच्छा जोर मार रही थी........आज पूरी हुई...........बहुत उम्दा लिखा है........पर एक बात तो कहूंगी कि तुम्हारी सोच, तुम्हारी अभिव्यक्ति औरों से हटकर है

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  6. स्वास्थ्य लाभ करें और परीक्षा में अच्छा करें। शुभकामनायें।

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  7. वाह ! क्षितिजा जी,
    इस कविता का तो जवाब नहीं !

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  8. गुनेह्गारों की मानिंद खड़े हैं हम
    इन रवायतों के कठ्घरों में
    दुनियावाले क्या समझेंगे इन्हें
    कुछ फैसले खुदा के होते हैं...
    bahut sundar bhav sath hi shabd arth de kar to aapne sone pe suhaga vali sthiti kar dee hai.badhai.

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  9. बहुत दर्द भरा है……………इतना दर्द मत सहो अभी अपनी परीक्षा पर ध्यान दो और अपनी सेहत का ध्यान रखो।

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  10. अति सुन्दर अभिव्यक्ति.आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा
    अपना ख्याल रखें.
    कभी समय मिले तो मेरे ब्लॉग पर भी आयें.

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  11. पिघले मोम की तरह उतरे तेरे सांचे में
    तेरे नज़रिए से खुद को तराशते गए
    उन्ही सोज़-ए-लम्हों में वजूद मेरा कायम है
    जो लम्हे तेरी पनाह के होते हैं...

    खूब कहा क्षितिजा......... बेहतरीन रचना है....
    अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें ....और फिर से नियमित लेखन करें ...शुभकामनायें

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  12. bahut pyari nazm .bahut ,bahut ,shukriya ji .

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  13. वाह! नज्म तो दिल पर छप गई...

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  14. Aap sada sukhi rahen...God Bless You...:)

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  15. Achchhi nazm.
    Take care.Take rest till you become perfectly all right.
    Good Wishes.

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  16. भावपूर्ण,मर्मश्पर्सी रचना....

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  17. ठीक से इलाज़ करा लें , स्वस्थ हो जाएँ ....फिर ब्लागिंग तो चलती ही रहेगी

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  18. pighle mom ki tarah utare tere saanche me

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  19. bahut sunder likha hai .
    Get well soon ...!!

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  20. सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  21. क्या कहूँ.... निःशब्द कर दिया आपने तो... बहुत सुंदर .........

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  22. बहुत लाज़वाब रचना..शुभकामनायें !

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  23. बहुत सुन्दर नज़्म ...
    शुभकामनाएँ ..
    स्वास्थ्य सर्वप्रथम

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  24. कुछ फैसले खुदा के होते हैं ....
    जी बिलकुल ...जल्दी लौटियेगा -ये रचनाएं हमें याद रहेगीं!

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  25. स्वास्थ्य लाभ करें और परीक्षा में अच्छा करें। शुभकामनायें।

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  26. आपको मदर्स दे कि बधाई और शुभकामनाएं |ब्लॉग पर वापसी के लिए कुछ नया लिखने के लिए कुछ नया रचने के लिए भी बधाई |अगर आप हिमांचल की खूबसूरत वादियों से लौटी हों तो एक छोटा संस्मरण अवश्य लिखे ताकि इस तपिश में हम भी स्केटिंग का सुख ले सकें |

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  27. मैं भी तो कहूँ की आखिर आप हैं कहाँ.....अच्छा तो तबियत नासाज़ थी.....खुदा आपको सेहत अता फरमाए....आमीन........पढ़ाई दिल लगा के कीजिये......खुदा आपको सफलता के ऊँचे मुकाम तक पहुँचाये.......आमीन......

    पोस्ट बहुत अच्छी है ....बहुत गहराई लिए हुए.......हम आपके लौटने का इंतज़ार करेंगे.....खुदा हाफिज़ |

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  28. बहुत अच्छा लिखा आपने|धन्यवाद|

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  29. that's superb mam
    nice blog following it

    chek out mine
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com

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  30. kamaal ki post ..bahut sundar....

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  31. After some wait but .... Excellent !!!
    hope ur good n enjoying ur life n studies.

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  32. http://aduanapt.blogspot.com/

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  33. क्षितिजा जी
    सादर अभिवादन !

    आपकी तरह मैं भी अधिक सक्रिय नहीं हूं नेट पर …
    आशा है , स्वास्थ्य अब ठीक होगा …
    पढ़ाई जारी है ? बहुत ख़ूब ! … सफलता मिले यही शुभकामना है !

    …और रचना तो भावपूर्ण है ही … लेकिन अपेक्षतया कुछ कमज़ोर ! छंद का व्यर्थ मोह पैदा न होने दें स्वयं में रचना करते वक़्त ।

    छंद को सचमुच साधना ही पड़ता है … और साधते रहना पड़ता है ।

    मेरे कहे का बुरा मानें तो दसगुना उपदेश मेरे यहां आ'कर दे जाएं … :)

    हार्दिक शुभकामनाएं !
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  34. its beautiful sweetheart....simply beautiful.....soooooooooo good to read u again :)

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  35. भावों का सुंदर अंकन।
    आपके स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं।

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  36. khubsurat aankhon se likhi gayi baton ka jabaab nahi

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  37. एक परिपक्व रचना - हार्दिक बधाई एवं शुभ आशीष

    विशेष

    "गुनेह्गारों की मानिंद खड़े हैं हम
    इन रवायतों के कठ्घरों में
    दुनियावाले क्या समझेंगे इन्हें
    कुछ फैसले खुदा के होते हैं..."

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  38. bahut hi sundar rachna..
    apni sehat ka bhi khayal rakhiye..
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

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  39. आपकी नयी पोस्ट का इंतज़ार है
    ----------------------------------------------
    कल 05/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  40. भावपूर्ण....... अच्छी रचना

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  41. wah... kya rachna hai..Excilent blog...

    Change Kanpur

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  42. सुप्रभातम पहले अध्ययन पर ध्यान दीजिए फिर तरोताजा होकर लौटिये |बहुत ही सुंदर नज्म है बधाई और शुभकामनायें |

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  43. बेहद गहरे अर्थों को समेटती खूबसूरत और संवेदनशील रचना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  44. Bahut hi khubsurat.....
    Abhar...

    ap bhi aye.

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  45. बहुत सुन्दर नज़्म ,.. दिल को छूती हही , मन में बस्ती हुई . और अपने शब्दों से हमें जोड़ती हुई कविता . बहुत अच्छा लगा पढकर .. यूँ ही और लिखे ...

    आभार
    विजय
    -----------
    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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  46. Bahut achcha likhati hain aap. Jald wapasi ki apeksha hai. Aapko achchi sehat ke liye aur achche nateeje ke liye shubh kamanaen.

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  47. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  48. ये साजिश भरे बेरहम मंजर ...बहुत सुन्दर क्षितिजा जी . ...शुभकामनाएं ....मानव और मानवता का ध्यान रखना हमारा फर्ज है . .... ..आप का स्वागत है आइये बाल झरोखा सत्यम की दुनिया व् अन्य पर भी
    शुक्ल भ्रमर ५

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  49. pighle mom ki taraha utare tere sanche mai
    tere nazariye se khud ko taraste gay
    Samarpan ka andaz aapse behatar ho hi nahi sakta

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  50. कहाँ हो.....इतने दिन से कोई खबर नहीं...उम्मीद करती हूँ कि ठीक होगी .

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  51. .



    क्षितिजा जी
    ब्लॉग जगत पलक-पांवड़े बिछाए'अंतर्जाल पर आपकी वापसी का इंतज़ार कर रहा है…
    :)

    आशा है, सपरिवार स्वस्थ-सानंद हैं …
    शुभकामनाओं सहित…

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  52. अच्छी भाव भरी रचना। बधाई!

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  53. antim panktiyon ka jawaab nahin...bahut sundar..!!

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  54. कमाल की नज्म है और कितनी बार पढ़ गिया हूँ | अब कैसी है आपकी सेहत ?

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