Friday, January 28, 2011

एक पल... एक ज़िन्दगी...

















...तुम्हारे लिए... सिर्फ एक पल
मेरे लिए... एक ज़िन्दगी...

...जितने पल तुमने मेरे साथ गुज़ारे हैं
उतनी ज़िंदगियाँ मैंने जीं हैं...

...न जाने कितनी बार मैंने जन्म लिया
जाने कितनी बार मैं मरी हूँ...

...पिछली बार जब तुम गए थे
वो आखरी बार था जब मैं मरी थी...

...उस दिन के बाद तुम लौटे
मैं जिंदा हुई...

...एक जिस्म है जो साँसे ले रहा है
राख़ होने का इंतज़ार कर रहा है...

Tuesday, January 25, 2011

खिलौने वाला .....





















....एक खिलौना बनाने वाले ने
कितने ही खिलौने बनाये हैं  ...


....अलग अलग रंग के
अलग अलग रूप के
अलग अलग कद काठी के ....

......कुछ सोने के
कुछ भूसे के बने हैं ...
कुछ कच्चे, कुछ पक्के हैं ...

....कहीं कोई मखमल में लिपटा है
तो कोई चीथड़ों से ढका है....
किसी के हाथ में चाँद है
किसी का मिट्टी से सना है ....
कुछ की बगल में खंजर रहते हैं
कुछ के नाज़ुक पतले गले हैं ...
किसी  के सर पे दस्तार सजे हैं
तो कुछ उनके आगे झुके हैं ...

.... अनगिनित हैं बेशुमार हैं
उसके आँगन में बिखरे पड़े हैं ....


... तजुर्बे पे तजुर्बे करता रहता है
खिलौने ही खिलौने बनाता रहता है
चाबी घुमाता रहता है
खेलता रहता है ....

Saturday, January 8, 2011

एक बर्फ-ज़दा समंदर ...

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं .....











कुछ पल क्षितिज पर ठहर कर 
मानो पूछ रहा हो मुझसे -......
  "कब तक तड़पता रहूँगा, जलता रहूँगा ....
    अपनी ही आग में ........
    क्या तुम्हारे पास भी मुझे चैन नहीं मिलेगा...
    बिना बुझे.............अंगारों में लिपटे 
    क्या आज भी मैं यूँ ही लौट जाऊँगा..."

काश! कहीं से मिल जाता एक बर्फ-ज़दा समंदर .....
क्षितिज को छूता हुआ, शीशे सा, जमा हुआ............
और मैं साहिल को पीछे छोड़ 
सर्द लहरों का हाथ थाम कर ..............
चल दूं नंगे पांव इस कांच के सपने पर
बर्फ की सारी ठंडक, उसकी तासीर .....
अपने में जज़्ब करती हुई..................
अपने सूरज से मिलने की धुन में मगन 
उस में खोई हुई..................................

पहुँच कर उसके पास बिना कुछ कहे
बढ़ा दूँगी अपना हाथ...........
बस एक बार छू लेने को उसे............
करीब जा कर रख दूँगी 
अपना बर्फ़ सा पाँव.........................
उसके जलते सुलगते सीने पे .........
........या तो मैं बुझा दूँगी उसकी आग
या मैं भी जल जाउंगी उसकी आग में ... 

................... तुमने बताया था एक बार 
तुम्हारे शहर में होते हैं ऐसे समंदर........
इस बार जब आओ तो साथ लेते आना...
...................शायद ये ही एक रास्ता हो 
जो तुम तक पहुँचता हो ......................

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