Monday, February 28, 2011

सुकून...




......सुकून ढूंढते ढूंढते आज
यादों के तहखाने में जा पहुंची...
सोचा एक बार यहाँ भी देख लूं...  
.......बहुत साल पहले
जब नए रिश्ते बनाए थे....
क्या मालूम....
....कुछ टूटे हुए रिश्तों के साथ
यहाँ रख दिया हो......

.....वहीँ एक कोने में पड़े  
पुराने दिनों पे नज़र गयी...
क्या हालत थी ....
उम्र हो चली थी ...
हैरान थी अब तक जिंदा कैसे हैं
...बदलते वक़्त की ज़र्द हवा
उन्हें ख़त्म नहीं कर पायी थी...
.....शायद बगल में रखे
टूटे रिश्तों के टुकड़ों से आती
एहसास की तपिश....
उन्हें आज भी जिंदा रखे थी...

मुझे देखा तो दिन बोले-
   " कभी हमें भी याद कर लिया करो "
बरसों बाद कोई बिछड़ा हुआ मिला था
कोई अपना मिला था....
मैं नम आखों से उनके पास पहुंची
वहीँ बैठ गयी .....
उनकी गोद में सर रख कर
वहीँ लेट गयी....
... सुकून के साथ सो गयी ......



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