Thursday, March 22, 2012

कारीगर.....

आप सब को मेरा प्रणाम... आप सबके बीच एक बार फिर हाज़िर हूँ... इतने लम्बे वक़्त तक गैर हाज़िर रहने के लिए माफ़ी चाहती हूँ... और अपनी वापसी की शुरुआत मैं अपनी एक पुरानी रचना के साथ करुँगी ... आशा करती हूँ की आपको पसंद आएगी ... धन्यवाद... 




 

काश! ये ज़ख्म भी कभी सिल पाता....
उधड़ा हुआ वो रिश्ता फिर जुड़ पाता....

न रिसता लहू, न दर्द उठता कभी
न ही नज़र आती कोई गाँठ कहीं
गिरहें न रहती, न निशाँ ही दिखता
न गिला , न शिकवा कोई....

काश! कोई कारीगर
 ऐसा मिल पाता .....
काश! ये ज़ख्म कोई ऐसे सिल 
पाता....

93 comments:

  1. bahut samay bad aapne aaj fir se blog world me aagaman kiya hai ...itni sundar rachna ke sath .badhai .

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है क्षितिजा जी.. :)

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  3. स्वागत है एक लम्बे अंतराल के बाद इस बेहतरीन रचना के साथ वापसी पर. अब नियमित रहें.

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद समीर जी ...

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  4. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया राजेंद्र जी ...:)

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  5. .


    क्षितिजा जी

    आपका कमेंट इतने लंबे अरसे बाद अचानक मिलना बहुत आश्चर्यजनक लगा ..
    .:)
    पुनः हार्दिक स्वागत है ...

    ~*~नव संवत्सर की बधाइयां !~*~
    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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    1. धन्यवाद राजेंद्र जी ... आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएं ... :)

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  6. बहुत सुंदर ....कैसी हैं...?

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    1. धन्यवाद मोनिका जी ... मैं ठीक हूँ .. :)

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  7. ऐसा कारीगर केवल ऊपर वाला ही है .पुनः स्वागत है आपका .

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  8. स्वागत है ,पहले अभिनंदन स्वीकारिये ..गिले शिकवे बाद में :)
    मगर अभी अभी तो आये हैं फिर कहते हैं जाए हैं ...यह भी कोई बात हुयी भला ?
    नाट डन!

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    1. धन्यवाद अरविन्द जी .. जा रही हूँ लेकिन ब्लॉग से नहीं जाउंगी ... :)

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  9. वापसी पर स्वागत है आपका , लाजवाब रचना के लिए आपका आभार .

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  10. आदरणीया क्षितिजा जी
    बहुत लंबे समय के बाद आपको पढ्न बहुत अच्छा लगा।
    प्लीज़ अब नियमित लिखती रहिएगा।

    सादर

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  11. आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ----------------------------
    कल 24/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. ज़ख्मों की सिलाई नही होती।

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  13. बहुत सुंदर कविता... आप का ब्लाग यहां शामिल कर लिया गया हे देखे...
    http://blogparivar.feedcluster.com/

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  14. कुछ रिश्ते जब टूटते हैं तो हम ही नहीं इश्वर भी यही सोचता होगा और परेशान होता होगा की काश कोई होता जो उन्हें फिर से बिना निशाँ ,सिल पाता या जोड़ पाता. बहुत सुन्दर रचना :)

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  15. एकबारगी तो यकीन नहीं हुआ कि आपने फिर से वापसी की है। हमने नया-नया लिखना शुरू किया था। तब आपके व्लॉग पढ़ता था काबिल-ए-तारीफ। आपकी रचनाओं में एक अलग रंग और दर्द विखरता है। रिश्तों की दरकती दीवार और जख़्मों को सिलने के लिए हमें खुद प्रयास करने पड़ते हैं...सफल और असफल जो भी हो। अब नई रचनाओं का इंतजार रहेगा।
    स्वागत है।

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  16. बेहतरीन। बहुत ही अच्छा लिखा है आपने। धन्यवाद

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  17. बुद्ध ने इसीलिए सम्यक् शब्द का प्रयोग किया। यह एक शब्द जीवन की सभी समस्याओं का समाधान है। चूकने के बाद रिश्ता फिर जुड़ भी जाए तो क्या,गांठ तो रहेगी।

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  18. सुन्दर प्रस्तुति..बहुत-बहुत बधाई । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  19. आपका पुनः स्वागत है,
    जख्म तो समय भी भर पाता है, धीरे धीरे।

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  20. एक दीर्घावकाश....ज़ख़्म, रिश्ते, कारीगर ...फिर healng without scar की ऐषणा....ज़रूर कोई बात है। किंतु....जैसाकि पाण्डेय जी ने फ़रमाया कि वक़्त से बेहतर और कोई मल्हम नहीं ..वह बात अलग हैकि हर ज़ख़्म का एक निशां तो रहता ही है। सृष्टि की नव वर्ष गांठ पर हम आपके लिये मंगलकामनायें करते हैं। ब्लॉग जगत के आपके अपने परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है। आप नव वर्ष में नव ऊर्जा के साथ अपनी यात्रा पुनः प्रारम्भ करें.....

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  21. और हाँ ! एक-दो दिन के आकस्मिक अवकाश से ही काम चला लिया करें :) इतना लम्बा अर्जित अवकाश लेना ठीक नहीं, हमारे जैसे लोग परेशान हो जाते हैं....कि लड़की को हुआ क्या?

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    1. धन्यवाद ... :) ... ab nahi jaungi ... :)

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  22. खुबसूरत नज़्म... वाह!
    सादर.

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  23. बहुत सुन्दर रचना...पहले कभी पढ़ा नहीं आपको...शायद हमारा आना और आपका जाना साथ हुआ हो...
    अब अटूट साथ की उम्मीद है...
    शुभकामनाएँ..
    :-)

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  24. where is my comment????

    eaten by SPAM i think....

    nice poem .....hoping to see some good writings in this blog..
    bless you!!!

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  25. बहुत दर्द है इन पंक्तियों में
    बहुत खूब

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  26. क्षितिजा ! इस छोटी सी उम्र में इतना दर्द कहाँ से लाई..?

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  27. बहुत मार्मिक प्रस्तुति...

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  28. खुशामदीद.....मुद्दत हो गयी आपके ब्लॉग पर कोई पोस्ट हुए.....खैर पुराणी ही सही पोस्ट बहुत अच्छी है......दुआ है की आगे भी आप ऐसे ही लिखती रहे......आमीन।

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  29. लंबे वकत के बाद वापसी औऱ स्वागत जोरदार मुबारक हो....बस अब मत लगाइएगा ब्रेक.क्योंकी ब्रेक लगता नहीं की कई चीजें निकल जाती हैं आगे..औऱ हम रह जाते हैं पीछे ..... यानि ब्रेक लगना अच्छी बात नहीं...

    रही कविता..पुरानी ही सही पर बात में तो दम है....अक्सर होता है कि हम खुद ही कारीगर होते हैं..खुद ही जख्मों को सिलना पड़ता है..औऱ कई बार होता तो ऐसा है कि सिलते-सिलते पता चलता है कि जख्म ही उधड़ गए हैं....है न मजेदार बात...

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  30. खूबसूरत..एहसास और शब्द दोनों

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  31. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ... :)

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  32. काश ऐसा हो पाता ....सुन्दर भाव

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  33. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  34. बेहद खूबसूरत नज़्म लिखी है आपने..
    और हाँ-
    "कभी मिल जाये कारीगर
    जो ज़ख्मों को हो सिलता,
    बता देना पता हमको
    हमारे ज़ख्म गहरे है.."

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  35. इन जख्मों को खुद ही सिलना होता है ... अच्छा लिखा है ...

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  36. बहुत बढिया !

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  37. गहन विचारो को व्यक्त करती बहुत ही
    सुन्दर रचना है....

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  38. बहुत अच्छी रचना। कोई कसक कविता बन गई हो जैसे।

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  39. उम्दा वापसी,क्षितिजा जी ! उम्मीद है व्यस्तताएँ अब सिमट गयी होंगी।

    आपकी रचना ने मेरा एक पुराना शेर याद दिलाया मुझे……
    "खुले हैं जख्म कई, रिस रहा है पैराहन…
    है कोइ इल्म जो निस्बत को भी रफ़ू कर दे"

    regards !

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  40. नवरात्र के ४दिन की आपको बहुत बहुत सुभकामनाये माँ आपके सपनो को साकार करे
    आप ने अपना कीमती वकत निकल के मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए तहे दिल से मैं आपका शुकर गुजर हु आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
    मेरी एक नई मेरा बचपन
    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन:
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/03/blog-post_23.html
    दिनेश पारीक

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  41. Hello Kshitija..
    thanks 4 dropping by and giving me the opportunity to land here :)
    Lovely blog u have..
    very strong and intense expressions in above lines :)
    Hope to c u more often !!

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  42. इन जख्मों को खुला ही रहने दो
    दर्द से भरे आंसुओं को खुला ही बहने दो ||
    शुभकामनाएँ!

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  43. दर्द से निजात की अभिलाषा!!
    गहन अभिव्यक्ति!!

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  44. welcome back kshitija ji ....
    very glad to see your precious comment on my post दो छवियाँ
    thanks a lot for that ...
    keep writing regularly ... my best wishes ...

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  45. दिल की बातें कागज पर उतर आती हैं तो कितना सुकून मिलता है।
    अच्छी कविता।

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  46. kaash , aisa koi kaarigar kahin mil paata

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  47. बेहद खुबसूरत ' काश ' सबकी आरजू यही 'काश'..

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  48. ऐसा कोई कारीगर दूर नहीं पास है, बहुत पास. इतना पास कि अक्सर वह दिखाई ही नहीं देता. परीक्षा में अच्छे नंबर आयें, इसी शुभकामना के साथ....

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  49. बहुत सुंदर एहसास ...
    भावप्रबल रचना ....!
    शुभकामनायें ...!

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  50. बहुत सुंदर लिखा हैं आपने क्षितिजा जी ...आपकी कविता और आपके ब्लॉग का डिस्क्रिप्शन दोनों बहुत पसंद आये

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  51. bahut sundar bhav ----------achcha laga aapke blog par aakar

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  52. बेहद खुबसूरत बेहतरीन
    मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ मेरा मार्ग दर्शन करे
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  53. जबरदस्त वापसी क्षितिजा जी
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति............

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  54. पुनर्वापसी की बधाई....मगर पुरानी रचना क्यूँ लायी....वैसे रचना तो अच्छी है भाई....!!

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  55. मार्मिक प्रस्तुति.

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  56. डुबोया मुझको होने ने ना होता मै तो क्या होता .अच्छी प्रस्तुति बधाई

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