Monday, April 2, 2012

बारिश...




बारिश की बूंदों में ये जिस्म घुलता जा रहा है
कहीं एक गहरा जख्म और सुलगता जा रहा है...


कुछ बूँदें गुम हो गयीं, कुछ ज़मीं में जज़्ब हो गयीं
मगर एक काफिला सिर्फ मुझे ढूँढता आ रहा है...


रिश्तों की गहरी धुंध मेरा रास्ता रोके खड़ी है
कोई अजनबी उसे चीरता हुआ करीब आ रहा है...


एक घना बदल था जिसे हवा का झोंका उड़ा ले गया
वहीँ छोटा सा एक टुकड़ा आँधियों से लड़ता जा रहा है...


हर एहसास को दफ़न करके साँसे ले रही थी
ये कौन है जो अब मुझे जीना सिखा रहा है ...


कब से ज़िन्दगी की किताब ख़त्म करने में लगी हूँ
ये वक्त है की नयी कहानियाँ लिखता जा रहा है...

69 comments:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....मन खिल गया पढ़ कर ....
    बहुत आभार

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  2. ....लाज़वाब अहसास...दिल को छूती बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!!!

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  3. बहुत खूब !
    उम्र भर सुनी दिमाग की आपने
    आज दिल आपका अपनी सुना रहा है ||
    शुभकामनाएँ!

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  4. itna achha padhne ke baad, kuch kahna zaroori hai kya ?? :))

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  5. बहुत सुन्दर......................
    लाजवाब गज़ल क्षितिज जी.
    too good!!!!

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  6. बहुत सुन्दर ...हर लफ्ज़ दूसरे का पूरक ....पहली बार आना हुआ आपके ब्लॉग पर ...मज़ा आ गया

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  7. सुभानाल्लाह........हर शेर बेहतरीन और शानदार...मुकम्मल ग़ज़ल.....दाद कबूल करें।

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  8. आप सभी गुनीजनो का धन्यवाद ... :)

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  9. वाह बहुत खूब लिखा है आपने बहुत ही सुंदर भाव संयोजन बधाई...

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  10. आज यूँ ही कुछ अपने के ब्लॉग पर जा रहा हूँ , यहाँ आया और तुम्हैरी लिखी नज्मो को पढ़ रहा हूँ , मुझे लग रहा है कि नहीं आना था. मेरे आंसुओ का क्या ..जो तुम्हारी लिखी पंक्तियों को पढकर बह रहे है. बधाई शब्द छोटा है .
    विजय

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  11. lajabab gajal... kahin aur aapki comment dekhi to wahan se aapke blog tak aa pahucha...!!
    par behtareen rachna..!

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  12. वाह! बहुत बढिया लिखा है।

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  13. आपका लिखना एक कयामत है
    आपको पढ़ना भी कयामत है
    सोचिए कि कितनी कयामतों से गुजर रहे हैं
    आपको पढ़ने वाले
    काबिल-ए-तारीफ ।
    हर एहसास को दफ़्न करके सांसे ले रही थी
    ये कौन है जो अब मुझको जीना सिखा रहा है।
    स्वागत है.......नई फुहारों में भी बारिश का सा एहसास मिल रहा है।

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  14. आपकी सक्रियता देखकर बहुत खुशी हुई |अच्छी गज़ल और ब्लॉग पर आने के लिए आभार |शायर अहमद फराज का एक शेर आपके लिए -
    रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ
    आ फिर से हमें छोड़ के जाने के लिए आ |

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  15. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  16. bahut hi umda rachna bdhaai aap ko

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  17. शुक्रिया आप सभी का ... :)

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  18. बहुत बढ़िया रचना,सुंदर लाजबाब अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....
    क्षितिजा जी,...आपकी पोस्ट पर आना अच्छा लगा,रचनाये पसंद आई
    फालोवर बन गया हूं,आपभी बने मुझे खुशी होगी,...आभार

    WELCOME TO MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

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  19. बहुत खुबसूरत कोमल अहसास और सुंदर शब्द संयोजन.......

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  20. बढ़िया अभिव्यक्ति!!

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  21. वाह बहुत सुन्दर उम्मीदों और उमंगों, आशा और विश्वास से लबरेज एक जीवंत सन्देश!

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  22. wah kya khoob likha hai apne ....badhai

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  23. बहुत खूबसूरत लिखा है आपने !

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  24. बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग "meri kavitayen"पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा.

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  25. रिश्तों की गहरी धुंध ...
    बहुत ही लाजवाब लगा ए शेर ... पूरी गज़ल मर्म को छूती है ...

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  26. बहुत बढिया.....

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  27. जितनी जिन्दगी समेटने का यत्न करें, यह उतनी ही फैलती जाती है।

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  28. बहुत खुबसूरत अहसास से भरी रचना....

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  29. रोज नए अफसाने बने और गुनगुनाने रहे . आमीन .

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  30. ये वक्त और नई नई कहानियां लिखे । और आप की नई रचनाएं हम पढते रहें सराहते रहें ।

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  31. आशा और आकांक्षाओं में डूबती उतराती बेहतरीन प्रस्तुति.

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  32. बहुत ख़ूबसूरत...हर पंक्ति दिल को छू जाती है....

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  33. रिश्तों की गहरी धुंध मेरा रास्ता रोके खड़ी है
    कोई अजनबी उसे चीरता हुआ करीब आ रहा है…

    … …
    भाव, भावना, भावुकता ने मिल कर काम किया है …
    अधिक कुछ कहते नहीं बन रहा … …

    क्षितिजा जी
    सुंदर प्रयास के लिए साधुवाद !!

    जयकृष्ण राय तुषार जी के कहे पर मत जाइएगा :)
    [मुझ जैसे अनाड़ी तक की तारीफ़ कर दिया करते हैं :))]
    ग़ज़ल भी हो जाएगी … अच्छी और बहुत सारी ग़ज़लें पढ़ती रहें … बस !
    :)

    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  34. कब से ज़िन्दगी की किताब खत्म करने में लगी हूँ
    ये वक़्त है की नई कहानियां लिखता जा रहा है ....

    क्या बात है बहुत खूब ....!!

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  35. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html

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  36. vakt hi tay karega jindagi ki kahani ki avadhi. behad khoobasurat andaj haen aapke.

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  37. वाह बहुत खूब लिखा हैं आपने ............आपके ब्लॉग का नाम और मेरे पहले संग्रह का नाम एक सा हैं ...........http://www.facebook.com/pages/Kshitija/105719209555331


    कुछ शब्द मेरे भी ........
    तेरी यादों को संभाल के ,रखूं कब तक |
    आँसू आँखों के उछाल के ,रखूं कब तक ||.......अनु

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  38. पहली बार आपके ब्लॉग में आया,आपकी रचना व लेखनशैली प्रभावशाली है. शुभकामनायें

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  39. बहुत सुंदर लिखा है।

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  40. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति.......

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  41. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  42. एक क्षितिज सी ....बहुत खूबसूरत ...
    ह्रदय की कोमल अभिव्यक्ती ....
    शुभकामनायें क्षितिजा जी .

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  43. bahut achhi gazal.......
    .....about ur blog 'el sadharan sa niyam hai.......' is just ultimate

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  44. बढ़िया रचना ...
    आभार आपका !

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  45. bahut badhiyaa geet man ko bhogo gaya,,,

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  46. Aaj Jindagi mujhe us haveli si lagti hai jo nani ke ghar ke peeche hi thi..ek khandahar ho chuki haveli jinmen 200 se upar kamre the...Kamre jo kabhi vyast the aaj khali hain...gallery men ghoomte ghoomte aksar lagta tha ki koi aahat si hogi aur koi darwaja khulega...koi kamre men bulakar koi dilchasp kissa kahega...par kabhi koi darwaja na khula...aaj bhi aksar wahan jaata hun us ummeed men hi ki kabhi to koi darwaja khulega.

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  47. रिश्तों की गहरी धुंध मेरा रास्ता रोके खड़ी है
    कोई अजनबी उसे चीरता हुआ करीब आ रहा है...

    हरेक पंक्ति मानो भावों के चित्र बना रही हैं !
    बहुत ही सुंदर ग़ज़ल।

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  48. कब से ज़िन्दगी की किताब ख़त्म करने में लगी हूँ
    ये वक्त है की नयी कहानियाँ लिखता जा रहा है...
    बहुत खूबसूरत बयाँ किया है आपने वाह!

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  49. शब्द चयन -सुन्दर
    भाव -प्रभावशाली |
    बहाव- लाजवाब ||

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  50. वाह....बहुत खूबसूरत लगी पोस्ट....शानदार।

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  51. सुन्दर अहसासों से भरी सुन्दर रचना....

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  52. This comment has been removed by the author.

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  53. कब से ज़िन्दगी की किताब ख़त्म करने में लगी हूँ
    ये वक्त है की नयी कहानियाँ लिखता जा रहा है...
    आज पुन; आपकी रचना पढी,उपरोक्त पंक्तियाँ मन को छू गयी

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  54. आपका लेखन ज़बरदस्त हैं

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  55. आपकी सभी प्रस्तुतियां संग्रहणीय हैं। .बेहतरीन पोस्ट .
    मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए के लिए
    अपना कीमती समय निकाल कर मेरी नई पोस्ट मेरा नसीब जरुर आये
    दिनेश पारीक
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/04/blog-post.html

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  56. कब से ज़िन्दगी की किताब ख़त्म करने में लगी हूँ
    ये वक्त है की नयी कहानियाँ लिखता जा रहा है..
    laajavaab

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  57. क्षितिजा जी,
    नमस्ते!
    ज़िन्दगी यूँही चलती रहे....
    आशीष
    --
    द नेम इज़ शंख, ढ़पोरशंख !!!

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  58. बेहतरीन गज़ल है!! :)

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  59. दिल से उछलकर निकली एक इमानदार रचना...रच-रच के किया गया शब्द संयोजन....
    दिल की मानिये ...दिमाग की सुनिये ...और सेहत का ख़्याल रखिये। कानपुर की गन्दगी भरे माहौल में टायफ़ायड होना स्वाभाविक है। पीएच.डी. के लिये मंगलकामनायें। तुम्हारा विषय बहुत बहुत बहुत रुचिकर है, मुझे तो सोचकर ही आनन्द आ रहा है।

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  60. ये वक़्त है कि नयी कहानियां लिखता जा रहा है......

    सच..... बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने....

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